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सर! चंदा नैतिकता के खिलाफ तो किसी का हक मारना कहां इंसाफ की बात

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बरेली। बरेली कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनुराग मोहन से विद्यार्थी परिषद कार्यकर्ता अपने राष्ट्रीय अधिवेशन के लिए पूरे 21 हजार का चंदा लेने पर अड़े हैं जबकि प्राचार्य इतना चंदा देने को तैयार नहीं हैं। बृहस्पतिवार को दूसरे दिन भी विद्यार्थी परिषद कार्यकर्ता अपने प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. भूपेंद्र सिंह के साथ चंदा लेने पहुंचे तो प्राचार्य से फिर नोकझोंक हो गई। प्राचार्य ने नैतिकता का हवाला दिया तो कार्यकर्ताओं ने यह कहते हुए उनकी दुखती रग पर हाथ रख दिया कि चंदा देना अगर नैतिकता के खिलाफ है तो डॉ. पूर्णिमा अनिल का हक मारना कहां इंसाफ की बात थी।
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विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता इससे पहले बुधवार को प्राचार्य डॉ. अनुराग मोहन के पास अपने राष्ट्रीय अधिवेशन के लिए चंदा मांगने पहुंचे थे। प्राचार्य अपनी इच्छा के मुताबिक चंदा देना चाहते थे लेकिन विद्यार्थी परिषद कार्यकर्ता चंदे के तौर पर 21 हजार रुपये से कम लेने को तैयार नहीं हुए। बात बढ़ते-बढ़ते प्राचार्य और विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं के बीच अच्छी-खासी तकरार हो गई जिसके बाद कार्यकर्ता बगैर चंदा लिए ही लौट गए। बृहस्पतिवार को प्राचार्य की शिकायत पर विद्यार्थी परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. भूपेंद्र सिंह उनसे मिलने कॉलेज पहुंचे तो संगठन के पदाधिकारी राहुल चौहान, गौरव यादव, योगेश पंडित भी पहुंच गए। इन लोगों ने प्राचार्य के प्रांतीय अध्यक्ष से शिकायत करने पर एतराज जताया तो फिर तकरार शुरू हो गई।
प्राचार्य ने चंदे के तौर पर 21 हजार रुपये की बड़ी धनराशि मांगने पर आपत्ति जताई तो विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारी भड़क गए और फिर नोंकझोंक शुरू हो गई। पदाधिकारियों ने प्राचार्य से कहा कि वे तो उन्हें सपोर्ट करते हैं फिर भी चंदा मांगने पर विवाद बना दिया गया। प्राचार्य ने कहा कि नैतिक मूल्यों के आधार पर उन्हें उनका सपोर्ट करना ही चाहिए, इस पर पदाधिकारियों ने उनसे पूछ लिया कि अगर वह नैतिकता की बात कर रहे हैं तो डॉ. पूर्णिमा अनिल का हक क्यों मारा। बोले, अगर नैतिकता का इतना ख्याल है तो प्राचार्य का पद छोड़कर डॉ. पूर्णिमा को प्राचार्य की कुर्सी पर क्यों नहीं बैठा देते। इस पर प्रांतीय अध्यक्ष के सामने ही फिर जमकर गर्मागर्मी हुई जिसके बाद विद्यार्थी परिषद कार्यकर्ता लौट गए। बता दें कि डॉ. पूर्णिमा अनिल के वरिष्ठ होने के बावजूद डॉ. अनुराग को कॉलेज का प्राचार्य बनाया गया है जिस पर डॉ. पूर्णिमा ने अफसरों के समक्ष प्रत्यावेदन भी कर रखा है। निवर्तमान डीएम और क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी मान चुके हैं कि डॉ. अनुराग मोहन की प्राचार्य पद पर नियुक्ति नियमों के खिलाफ है।
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