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UP: सलमा के सपने टूटे... आलिम का परिवार, चार साल के तैमूर को अब्बू का इंतजार; 20 दिन पहले हुई थी आरिफ की शादी

Mon, 11 Dec 2023 11:30 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, बरेली

सार

Bareilly Car Fire Accident: जाम शुमाली गांव निवासी आरिफ (23) का निकाह 19 नवंबर को मोहम्मदपुर गांव निवासी सलमा से हुआ था। वह सलमा को भी शादी में ले जाना चाहते थे पर उसने मना कर दिया था। सलमा ने आरिफ को भी जाने से रोकने का प्रयास किया था, लेकिन वह नहीं माने। आरिफ की मौत की खबर ने परिवार को हिलाकर रख दिया। 
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Bareilly Car Fire Accident - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली के भोजीपुरा में हुए हादसे से जाम शुमाली गांव की हर गली चीत्कार उठी। हाथों की मेहंदी छूटने से पहले बेवा हुई सलमा दहाड़ें मारकर रो रही थी। आलिम की मौत से उसका परिवार पूरी तरह टूट चुका है। मोहम्मद अय्यूब के चार साल के मासूम तैमूर ने दादी से सवाल दागा कि अब्बू कब आएंगे? इस पर वहां मौजूद हर शख्स निरुत्तर हो गया। 
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दूल्हे उवैश के रिश्तेदार आसिफ काफी पहले से शादी की तैयारियों में जुटे थे। बरात में थिरक रहे बाबू को यह कतई एहसास नहीं था कि कुछ ही पलों में मौत उनको खींच ले जाएगी। सात जनाजे साथ उठे तो पूरा गांव रो पड़ा। दर्द की यह अंतहीन टीस परिजनों को उम्रभर सालती रहेगी।

जाम शुमाली गांव निवासी आरिफ (23) का निकाह 19 नवंबर को मोहम्मदपुर गांव निवासी सलमा से हुआ था। वह सलमा को भी शादी में ले जाना चाहते थे पर उसने मना कर दिया था। सलमा ने आरिफ को भी जाने से रोकने का प्रयास किया था, लेकिन वह नहीं माने। आरिफ की मौत की खबर ने परिवार को हिलाकर रख दिया। 
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सलमा को पति की मौत का यकीन तक नहीं हो रहा है। उसने शादी में तमाम सेल्फी लीं पर फोन भी उनके साथ ही खाक हो गया। आरिफ मजदूरी कर परिवार को पालते थे। उनकी बहन गुलिस्ता का रो-रोकर बुरा हाल है। 
 

मोहम्मद अय्यूब (35) मजदूरी करके परिवार पालते थे। उनकी चार बेटियां व दो बेटे हैं। उनकी पत्नी अफसाना व मां चंदा का रो-रोकर बुरा हाल है। सास कभी बहू को ढांढस बंधाती तो कभी खुद ही रोने लगतीं। जिसने भी उनकी इस हालत को देखा, उनकी आंखें भर आईं। 

 

वह चीख-चीखकर कह रहीं थी कि मेरा लाल आने वाला है। गोद में बैठा चार साल का तैमूर बार-बार दादी से कह रहा था कि बरात तो आ गई, अब्बू कब आएंगे। मासूम की इस रट ने वहां मौजूद लोगों को रुला दिया। अफसाना बेटे को सीने से लगाकर समझा रही थीं कि अब अब्बू नहीं आएंगे।

मोहम्मद आलिम (19) दो भाई व दो बहनों में दूसरे नंबर पर थे। पिता जाहिद अली बीमार रहते हैं। आलिम दिहाड़ी मजदूर थे। उनके बड़े भाई तालिब भी मजदूरी करते हैं। उनकी मां अफसाना का रोकर बुरा हाल है। बहनें नगमा व फिजा सुधबुध खो बैठी हैं। उनके बीमार पिता जाहिद अली को इस बात की चिंता है कि अब परिवार कैसे चलेगा? आलिम का बड़ा बेटा पढ़ रहा है। उसकी पढ़ाई और पिता जाहिद की दवाई का खर्च भी आलिम ही उठाते थे।

बैलगाड़ी चलाकर परिवार चला रहे थे आसिफ
आसिफ (20) बैलगाड़ी चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। इन दिनों वह गांव के किसानों का गन्ना चीनी मिल में पहुंचाने का काम कर रहे थे। पांच भाइयों व दो बहनों में आसिफ छठवें नंबर पर थे। हादसे की खबर सुनकर आसिफ के माता-पिता बेसुध हो गए। वह कुछ भी बता पाने की स्थिति में नहीं थे। उनके दरवाजे पर भीड़ जुटी थी। हर कोई उन्हें ढांढस बंधा रहा था। मां आमना बस अपने बेटे आसिफ के आने की बात कह रही थीं। महिलाओं के बीच से उठकर कभी घर के दरवाजे तक आतीं तो कभी वापस लौट जाती थीं। 
 

राजमिस्त्री शादाब ही थे परिवार के खेवनहार
शादाब (22) चार बहनों व तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। उनका निकाह नहीं हुआ था। राजमिस्त्री का काम कर परिवार पालते थे। उनकी मौत की खबर ने परिवारजनों को हिलाकर रख दिया। उनकी मां हाजरा अपने शौहर माजिद से कह रही थीं कि शादाब की तबीयत खराब है, उसका इंतकाल नहीं हुआ है। इंतजार करो वह अस्पताल से आने वाला है। बेटे के गम में सुध खोई मां की हालत देखकर परिवार के बाकी लोग भी रो रहे थे। 
 

दूल्हे के चाचा थे आसिफ
मोहम्मद आसिफ (30) उवैस के चाचा लगते थे। रविवार शाम छह बजे सभी बरातियों को गाड़ियों में बैठाने के बाद वह सबसे पीछे वाली कार से निकले थे। उनकी पत्नी अंजुम रोकर कह रही थीं कि बरात में जाने के लिए एक महीने पहले ही सूट सिलवाया था। उनकी बेटी दो साल की व बेटा अर्शलान छह माह का है। उनकी शादी को चार साल ही हुए थे। मां चंदा बी ने बताया कि आसिफ उनका सबसे होनहार बेटा था। उसे खेती का शौक था। खेती करके ही दो ट्रैक्टर ले लिए थे। बेटे अर्शलान को बड़े स्कूल में तालीम दिलाने का सपना संजोया था।

भतीजे की शादी में खूब नाचे थे बाबू
बाबू (38) भी दूल्हा उवैस के चाचा थे। वह ई-रिक्शा चलाकर परिवार का गुजारा करते थे। परिवार में पत्नी, दो बेटे व दो बेटियां हैं। उनकी मौत की खबर मां असगरी बेगम को किसी ने नहीं दी। सुबह छह बजे उनके घर भीड़ जुटने लगी तो उन्हें शक हुआ। इस बीच बाबू की पत्नी साइन अपनी सास से लिपटकर रोने लगी तो वह भी फफक पड़ीं। साइन ने बताया कि उवैस की शादी को लेकर उनके शौहर बाबू इतना खुश थे कि ई-रिक्शा लेकर लौटने के बाद रोज दावत बांटने चले जाते थे। वह लोगों से कहते थे कि हमारे भतीजे की शादी में जरूर आना। संवाद
 
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फुरकान ने कहा था- अम्मी, अबकी नहीं बचूंगा
फुरकान कार चलाते थे। पांच भाइयों में वह चौथे नंबर पर थे। उनकी मां नूरी निशा बताती हैं कि एक माह पहले फुरकान के पैर में चोट लग गई थी। उन्होंने टोका था तो फुरकान ने मां से कहा था कि अम्मी अगर अब एक्सीडेंट हुआ तो वह नहीं बचेगा। फुरकान की इस बात को सोच-सोचकर मां रो रही थीं। रविवार शाम चार बजे वह घर से कार लेकर गए थे। छह बजे बरात जाम से बरेली के लिए रवाना हुई और रात दो बजे परिजनों को फुरकान के मौत की खबर मिली। संवाद
 
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