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डीएम की कमेटी की बताई फर्म से खरीदा था फर्नीचर.. घटिया है तो मरम्मत करा लेंगे

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बरेली। सांसद और विधायक निधि से 140 स्कूलों में घटिया फर्नीचर की सप्लाई के मामले में बीएसए की ओर से जांच के लिए जारी पत्र सार्वजनिक हुआ तो विभाग में ही सवाल उठने लगे। बीएसए ने इस पत्र में उल्लेख किया है कि तत्कालीन डीएम की ओर से जिस फर्म को फाइनल किया गया, उसी से फर्नीचर खरीदा गया। तत्कालीन डीएम ने सत्यापन कराकर फर्नीचर को ओके भी कर दिया था। हालांकि बीएसए ने सभी बीईओ को तीन दिन में फर्नीचर का सत्यापन कर रिपोर्ट देने को भी कहा है।
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पिछले दिनों डीएम नितीश कुमार ने गांव मझौआ के बेसिक स्कूल का निरीक्षण किया था। स्कूल में फर्नीचर की हालत बेहद खराब मिली तो डीएम ने सीडीओ से सांसद और विधायक निधि से करीब 140 स्कूलों में सप्लाई किए गए फर्नीचर की जांच कराकर रिपोर्ट देने को कहा था। सीडीओ ने 14 जनवरी को बीएसए को जांच के लिए निर्देशित करने के साथ ही ‘मैसर्स महावीर फर्नीचर’ फर्म का भुगतान रोकने के निर्देश दिए। 22 जनवरी को सीडीओ ने फिर एक आदेश किया, इसमें उन्होंने फर्म के भुगतान पर पूरी तरह रोक लगा दी। कहा- फर्म संचालक स्कूलों को सप्लाई घटिया फर्नीचर वापस ले और उसके स्थान पर अच्छी गुणवत्ता का फर्नीचर दे, तभी उसे भुगतान किया जाए। साथ ही, बीएसए से भी 140 स्कूलों क ो जारी थ्री सीटर डेस्क-बेंच की मानकों के अनुसार गुणवत्ता परखने के निर्देश दिए। इस मामले में अब बीएसए तनुजा त्रिपाठी ने बीईओ को जांच के निर्देश दिए हैं।

सीडीओ ने कहा नया लगाओ बीएसए ने कहा ठीक कराएंगे
140 स्कूलों को सप्लाई घटिया फर्नीचर के मामले में बीएसए की ओर से दिए गए जांच आदेश में कहा गया है कि सभी स्कूलों में विभाग की ओर से मिली डिजाइन के अनुसार ही फर्म ने फर्नीचर की आपूर्ति की थी, जिसे तत्कालीन डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने सत्यापित भी किया है। इसके बाद भी अगर किसी स्कूल के फर्नीचर में टूट-फूट, एंगिल उखड़ना या बेल्डिंग छूटने जैसी कोई खामी है तो उसे ठीक कराने के लिए रिपोर्ट बीईओ से मांगी है, जबकि सीडीओ ने फर्म को पूर्व में जारी आदेश में फर्नीचर बदलकर उसके स्थान पर नया अच्छी गुणवत्ता का फर्नीचर लगाने को कहा था।
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जमकर हुआ है फर्जीवाड़ा
स्कूलों को सप्लाई किए गए फर्नीचर में बड़े पैमाने पर घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया है। बकौल सीडीओ सत्येंद्र कुमार, करीब छह स्कूलों में उन्होंने खुद निरीक्षण किया था, इसमें घटिया क्वालिटी का फर्नीचर मिला था। सत्यापन के दौरान जो फर्नीचर दिखाया गया था, वह मानकों के अनुसार था, लेकिन सप्लाई के दौरान फर्म ने खेल कर दिया। फर्नीचर की मोटाई और मजबूती नहीं थी। उसमें लगाई गई प्लाई थी बेहद खराब क्वालिटी की है। उन्होंने आशंका जताई थी कि यह फर्नीचर पांच साल में ही बेकार हो जाएगा, इसलिए उन्होंने मानकों के अनुरूप दूसरा फर्नीचर सप्लाई करने का आदेश फर्म को दिया।

डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी के सत्यापन के बाद ही फर्म ने स्कूलों में फर्नीचर सप्लाई किए थे। डीएम के आदेश पर बीईओ को फर्नीचर की गुणवत्ता संबंधी जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। - तनुजा त्रिपाठी, बीएसए
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