इसलिए स्थगित करनी पड़ी नीलामी
दोपहर 2:30 बजे जांच के बाद एडीएम वित्त ने स्पष्ट किया कि नियम व शर्तों के अनुसार केवल डिमांड ड्राफ्ट ही मान्य है, चेक किसी भी दशा में मान्य नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी चीनी मिल की खरीद में चेक बाउंस हो चुका है। इसलिए चेक स्वीकार नहीं किया जा सकता। नीलामी के लिए कम से कम तीन खरीदार होना अनिवार्य है और वर्तमान में केवल एक ही पात्र है, लिहाजा नीलामी स्थगित की जाती है।
आदेश सुनते ही तहसील परिसर में मौजूद किसान भड़क गए। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष चौधरी जगत सिंह, तहसील अध्यक्ष राजेश गुप्ता, रालोद के सचिन चौधरी, भाकियू भानु के युवा प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर अनुज ठाकुर, गन्ना समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह, कोषाध्यक्ष नरेंद्र सिंह सहित कई किसानों व वकीलों ने एडीएम का घेराव कर हंगामा शुरू कर दिया।
किसानों ने दो मांगें रखीं, या तो डीडी जमा करने वाले को ही जमीन दे दी जाए, या चेक लाने वालों को भी बोली में शामिल किया जाए। एडीएम ने दोनों ही तर्क नियम विरुद्ध बताकर खारिज कर दिए। किसानों का आरोप था कि प्रशासन चेक लाने वालों से लिखित में कारण पूछ रहा है, फिर बोली से वंचित क्यों कर रहा है?
इसी बीच मौके पर पहुंचे पूर्व ब्लॉक प्रमुख व भाजपा नेता मोहन सिंह ने कहा कि प्रशासन ने इतनी कड़ी शर्तें लगा दी हैं कि डीडी जमा करना मुमकिन ही नहीं है। इस बात को लेकर उनकी एडीएम से तीखी बहस भी हुई। आक्रोशित किसान नीलामी हॉल में ही जमीन पर धरने पर बैठ गए।
अफसरों के आश्वासन पर शांत हुए किसान
गन्ना समिति के अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष भी उनके साथ बैठ गए। स्थिति बिगड़ती देख एडीएम फाइनेंस खुद किसानों के बीच जमीन पर बैठे और उन्हें समझाया। उन्होंने आश्वस्त किया कि यदि सोमवार तक और खरीदारों के डिमांड ड्राफ्ट आ जाते हैं, तो जल्द ही नीलामी प्रक्रिया पूरी करा दी जाएगी, जिसके बाद किसान शांत हुए।