हवा में घुले प्रदूषण के कण
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. सतीश चंद्रा के मुताबिक पहाड़ों से शहर में प्रवेश कर रही हवा में नमी का स्तर 80 फीसदी के पास है। पटाखों के जलने से उत्सर्जित हानिकारक गंधक, पोटाश, कार्बन मोनो ऑक्साइड आदि गैसों के कण फंस जाते हैं। जो संघनित होकर धुंध की परत बनाते हैं। ऐसी स्थिति में सांस के साथ ये गैसें भी शरीर में प्रवेश करती हैं। सांस रोगियों की तकलीफ बढ़ती है। सामान्य लोगों के गले में खराश सी होती है।
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निर्माण कार्य शुरू होने पर और बढ़ेगा प्रदूषण
दिवाली पर प्रदूषण का स्तर बीते वर्षों से कम होने की एक वजह यह भी है कि पंच दीपोत्सव पर्व पर विभागों में अवकाश है। निर्माण कार्य अभी ठप हैं। भैया दूज त्योहार मनाने के बाद कार्य शुरू होंगे। तब तक अगर एक्यूआई सामान्य नहीं हुआ तो इसके और बढ़ने की आशंका भी है। वहीं, लंबे समय तक प्रदूषण का स्तर ऑरेंज लेवल पर दर्ज होने से सरकारी, निजी अस्पतालों की ओपीडी में सांस रोगियों के बढ़ने की आशंका है।
आवासीय इलाके की हवा सांस लेने लायक नहीं
प्रदूषण विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो व्यावसायिक इलाके के सापेक्ष आवासीय इलाके की हवा दम घोंटू रही। आवासीय क्षेत्र राजेंद्र नगर का एक्यूआई 259 यानी सामान्य से करीब डेढ़ सौ एक्यूआई ज्यादा हानिकारक स्तर (ऑरेंज) पर दर्ज की गई। जबकि सिविल लाइंस के व्यावसायिक क्षेत्र सिविल लाइंस की हवा का एक्यूआई 132 (येलो) रहा। तेज हवा या बारिश होने तक प्रदूषण का स्तर शहर पर हावी रहने का अनुमान है।
पटाखों की बिक्री ने भी बनाया रिकॉर्ड
दिवाली पर बीते वर्ष करीब 25 करोड़ का कारोबार हुआ था पर इस वर्ष आंकड़ा 45 करोड़ के पार जा पहुंचा। उप्र उद्योग व्यापार मंडल के प्रांतीय महामंत्री राजेंद्र गुप्ता के मुताबिक कारोबार में बढ़त की एक वजह बीते वर्ष से कीमत ज्यादा होना और दूसरी वजह, त्योहार को हर्षोल्लास से मनाने के लिए जेब की परवाह न करना रहा। कई कारोबारियों ने पटाखों को अधिकतम खुदरा से भी ज्यादा कीमत पर भी बेचा।