तीनों के शौहर हैं भारतीय
मुनारा और उसकी बहनों की जिंदगी फर्जी भारतीय पहचान ओढ़कर बरसों से चल रही थी। इस बीच मुनारा की खुराफात से दोनों बहनें भी पुलिस के शिकंजे में फंस गईं। अब इन सभी को जेल जाना पड़ेगा। उनके शौहर स्थानीय होने से परिवार की पहचान जरूर भारतीय है।
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मुनारा का भाई अजीजुल इस्लाम भी हाफिजगंज कस्बे में रहता है और ईंट भट्ठे पर काम करता है। उसने बताया कि उनका परिवार बरसों पहले से कोलकाता में खानाबदोश के रूप में रहता था। कई साल पहले मुनारा की शादी बरेली के मौलानगर में हुई थी। अब मुनारा की उम्र 65 साल है। उसके पति की मौत हो चुकी है। मुनारा का उन लोगों से करीब बीस साल से कोई लेना-देना नहीं है।
पुलिस पहुंची तो खुला भेद, पड़ोसी भी हैरान
मुनारा से मिले इनपुट के बाद इंस्पेक्टर पवन कुमार ने पुलिस टीम के साथ हाफिजगंज के बाजार मोहल्ले में दबिश दी। यहां 15 साल से रह रही सायरा बानो और तस्लीमा को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया। पड़ोसी चौंके और पूछताछ की तो पता लगा कि दोनों महिलाएं फर्जी कागजों से भारतीय पहचान बनाकर रह रही थीं। प्रेमनगर पुलिस भी साथ थी।
बताया गया कि तीनों बहनों के विरुद्ध धोखाधड़ी, जालसाजी कर फर्जी दस्तावेज़ बनाने, विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है। पुलिस व एजेंसियों को शक है कि मुनारा के पीछे पूरा नेटवर्क काम कर रहा है। अब पुलिस इनके संपर्कों और मददगारों की तलाश कर रही है।
एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि शहर में रह रही मुनारा बी की बांग्लादेशी पहचान का मामला सामने आया है। हाफिजगंज में रह रहीं उसकी दो बहनों के प्रमाणपत्र भी जाली बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक जानकारी के आधार पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। कुछ लोगों से पूछताछ की जा रही है। जल्द ही सच्चाई सामने आ जाएगी।