ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार खुशदिली के माहौल में मनाया गया। नमाज के बाद मुस्लिमों ने बकरों दुंबों की कुरबानी दे कर त्योहार की रस्म को अकीदत के साथ पूरा किया। साथ ही एक दूसरे से गले मिलकर मुबारकबाद दी।
बकरीद को लेकर लोगों में सुबह से ही भारी उत्साह रहा। फज्र की नमाज के बाद ही तमाम मोहल्लों में भारी चहर पहल हो गई थी। कुरबानी के लिए लाए गए बकरों को सुबह से चारा पानी देने और देखभाल में लोग लग गए। बच्चे भी सुबह ही बकरों की रस्सी पकड़ कर टहलाने और खेलने निकल पड़े। थोड़ी ही देर में सभी छोटे बड़े खुद नमाज की तैयारी में जुट गए। नमाज पढ़ कर लौटने के बाद लोगों ने कुरबानी की रस्म अदा की। दोपहर तक कुरबानी का दौर चलता रहा।
इस बीच मुबारकबाद देने और तबर्रुक बांटने का सिलसिला शुरू हुआ जो शाम तक जारी रहा। इधर घरों में मीट के तरह-तरह के पकवान तैयार किए जाते रहे। रात में तमाम घरों में दावतों में दौर चला। इसमें विभिन्न डिशों के साथ शीरमाल और खीर, शीरनी व किमामी सेंवईयां भी दस्तरख्वान की शान बनी। इस पूरे माहौल के बीच मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में भारी रौनक रही। इसमें खास तौर से पुराना शहर व किला क्षेत्र के तमाम मोहल्लों सहित शाहबाद, आजमनगर, बांसमंडी, कोहाड़पीर आदि रहे।