फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सिल्ट तो नहीं, 2.33 करोड़ साफ हो गए

Tue, 17 Mar 2015 02:14 AM IST
बरेली
विज्ञापन
विज्ञापन
नहरों में सिल्ट की सफाई के नाम पर भी जिले में इस बार बड़ा खेल हुआ है। सिल्ट की सफाई पर सवा दो करोड़ से ज्यादा रकम खपा दी गई फिर भी जिले की 50 फीसदी से ज्यादा नहरों में पानी नहीं पहुंचा। यही नहीं मार्च खत्म होने को है फिर भी इस मद में लाखों रुपया अभी भी सिंचाई विभाग के पास बचा पड़ा है।
विज्ञापन

बरेली और आसपास जिले में नहरों की सफाई के लिए हर साल करोड़ों रुपया आता है। अफसर, ठेकेदारों और नेताओं की जुगलबंदी से इसे खूबसूरती से ठिकाने लगा दिया जाता है। इस बार भी ऐसा ही हुआ है। जिले में नहरों और माइनरों की सिल्ट सफाई को दो करोड़ 96 लाख 78 हजार रुपया भेजा गया। इससे 54 रजवाहों और 101 माइनरों की सफाई दिखाकर दो करोड़ 33 लाख 85 हजार रुपया खर्च दिखा दिया गया। इस तरह विभाग ने करीब 78 प्रतिशत काम पूरा दिखा दिया। करीब 62 लाख 93 हजार रुपया अभी भी शेष है। सूत्रों की मानें तो इस धनराशि को भी किसी और मद में खपाने की तैयारी की जा रही है।
सिर्फ यही नहीं इन नहरों में से कुछ की सिल्ट सफाई का सोशल आ़िडट भी दिखा दिया गया है। कमिश्नर की मंडलीय बैठक में सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने 54 रजवाह में से चार की सिल्ट सफाई का सोशल आडिट होने के कारण पेश किए। इसी तरह 155 माइनरों में से 61 माइनरों का सोशल आडिट होने का उल्लेख किया है। यह अलग बात है कि यह सोशल आडिट भी कागजी खानापूरी से ज्यादा कुछ नहीं है।
विज्ञापन


किसान बोले- पूरे सीजन सिंचाई को तरसते रहे
सिंचाई विभाग के आंकड़ों की पोल उन क्षेत्रों के किसान खोलते हैं जहां मजदूरों से नहरों में सिल्ट सफाई कराना दिखाकर मोटी रकम डकारी गई है। फरीदपुर के किसान गजेंद्र सिंह कहते हैं कि टिसुआ कैनाल में जेसीबी से डेढ़ किमी हरैली तक सफाई कराई गई। बाकी कैनाल को यूं ही छोड़ दिया गया। शुरू में नहर के कुछ हिस्से में पानी आया। इसके बाद से नहर सूखी पड़ी है। खंजनपुर के रामआसरे कहते हैं कि फरीदपुर से बाकरगंज जाने वाली नहर पूरे सीजन सूखी पड़ी रही। बहेड़ी के किसान चेतराम मौर्य कहते हैं कि हसनपुर से दोपहरिया गांव तक जाने वाली रजवाह में हाईवे किनारे के कुछ हिस्से पर जेसीबी से सफाई कराई गई। नहर में पानी न आने से किसान मायूस रहे। राजेंद्र सिंह कहते हैं कि उनई गांव की माइनर में कई बरसों से आज तक पानी नहीं आया।
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें