बरेली। पंजाबी महासभा ने बैसाखी का पावन पर्व बड़े ही हर्षोल्लास और सेवा भावना के साथ मनाया गया। इसमें शहर के डीडी पुरम क्षेत्र में लंगर का आयोजन किया गया। समाज के लोगों ने एकजुट होकर खुशियां बांटीं और राहगीरों को प्रसाद वितरित किया।
इस मौके पर अध्यक्ष संजय आनंद ने कहा कि बैसाखी का आध्यात्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व है। आज ही के दिन गुरु गोबिंद सिंह जी ने ''''खालसा पंथ'''' की स्थापना कर मानवता को स्वाभिमान और वीरता से जीने का मार्ग दिखाया था। नूतन वर्ष का आरंभ बैसाखी को सौर नव वर्ष के रूप में भी मनाया जाता है, जो नई ऊर्जा और फसलों की कटाई की खुशी लेकर आता है।
इस दौरान जलियांवाला बाग के शहीदों को नमन करते हुए वीर सेनानियों को भी याद किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सतीश कातिब ''''''''मामा'''''''' (पार्षद) ने की। लंगर में मुख्य रूप से पूरी-आलू, जलेबी, दही और केले का वितरण किया गया। गर्मी को देखते हुए विशेष रूप से जलजीरे की भी व्यवस्था की गई।
कार्यक्रम में देवराज चंडोक, अमित अरोरा, नमित गुलाटी, प्रिंस सोढ़ी, गुलशन आनंद, मनीषा आहूजा, संजीव आनंद और रणजीत सिंह काका का विशेष सहयोग रहा। सभी ने एक-दूसरे को गले लगकर बैसाखी की लख-लख बधाइयां दीं और समाज की उन्नति का संकल्प लिया।