श्री रानी महा लक्ष्मीबाई रामलीला समिति की ओर से आयोजित रामलीला में अगस्त्य मुनि, सुतिछड़ा और दंडक वन की लीला का मंचन किया गया। इसके बाद दशरथ मरण की लीला का भी मंचन हुआ।
जोगी नवादा वनखंडी नाथ की रामलीला में भरत मिलाप, सुतिछड़ा, अगस्त संवाद और राम का दंडक वन में प्रवेश करने की लीला का मंचन हुआ। दशरथ मरण का समाचार सुन भरत जी विषाद में डूब जाते हैं और राजा बनने से भी इनकार कर देते हैं। इस दौरान समूची अयोध्या शोक में डूब जाती है। इससे पहले सुबह के सत्र में मीराबाई की लीला का मंचन किया गया।
इसी क्रम में उत्तराखंड सांस्कृतिक समाज राजेंद्र नगर की 37 वीं रामलीला का शुभारंभ रविवार को हुआ। पहले दिन कैलाश पर्वत पर भगवान शिव मां पार्वती संग बैठकर ध्यान मग्न हैं और राम-राम का जाप कर रहे हैं। तो पार्वती मां के पूछने पर कि ये राम कौन है। तब वे पूरी कथा सुनाते हैं। रामलीला में मुरारी लाल शाह, रमेश चंद्र पंत, डीडी बेलवाल, अध्यक्ष आनंद सिंह भंडारी आदि ने सहयोग किया।