फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हूटर-बत्ती लगी खाली गाड़ियां दौड़वाकर नहीं बिगड़ने दी फिजा

विज्ञापन
विज्ञापन

छह दिसंबर को अयोध्या में विवादित ढांचा गिरते ही सड़कों पर उतर आए थे लाखों लोग

विज्ञापन

देशदीपक वर्मा
तत्कालीन डीएम
बरेली। 1992 में बरेली में तैनात रहे डीएम देशदीपक वर्मा 27 साल बाद भी शहर का वह नजारा नहीं भूल पाए जब छह दिसंबर को अयोध्या में कारसेवकों ने विवादित ढांचा गिरा दिया था। रेडियो पर समाचारों के जरिये यह खबर मिलते ही लाखों लोग शहर की सड़कों पर निकल आए थे। इसी दौरान वह शहर में निकले तो अयूब खां चौराहे पर नारेबाजी करते हुए हजारों लोगों ने उनकी गाड़ी को घेरकर रोक लिया था। लोगों को संभालना मुश्किल था, फिर उन्होंने उनसे बात की और अमन-चैन बनाए रखने का वादा कराया। अगले दिन शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया।
तत्कालीन डीएम देशदीपक वर्मा ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद अमर उजाला से फोन पर बातचीत करते हुए बताया कि छह दिसंबर 1992 को रविवार था, दोपहर बाद अयोध्या में ढांचा गिरने की खबरें आनी शुरू हो गईं थी। प्रशासन पहले से सतर्क था इसलिए फौरन जिले में धारा 144 लगा दी गई। इसके बाद भी शाम होते ही सड़कों पर भीड़ बढ़ने लगी और देखते-देखते लाखों लोग इकट्ठे हो गए। हालात बिगड़ने के अंदेशे से प्रशासन चौकन्ना हो गया। वह अपनी कार से शहर का जायजा लेने निकले। सिविल लाइंस के बाजार में पहुंचे तो वहां भारी भीड़ जमा थी। नारेबाजी के साथ हर तरफ शंख और घंटे घड़ियाल बजाए जा रहे थे। लोग जबर्दस्त आशितबाजी कर रहे थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

उन्होंने यह नजारा देखने के बाद अपने कैंप आफिस लौटकर सबसे पहले स्थिति पर काबू पाने के लिए कर्फ्यू लगाने की घोषणा की। इसके बाद भी मुश्किल यह सामने आई कि उस समय वाहन और फोर्स जैसे संसाधन काफी सीमित थे। उन्होंने दूसरे विभागों के सरकारी वाहनों पर हूटर और नीली बत्ती लगवाई और फोर्स के बगैर ही उनके ड्राइवरों को संवेदनशील इलाकों में घूमने को कहा। वे लोग पर रात भर गाड़ियाें में हूटर बजाते हुए घूमने लगे तो लोगों को भरोसा हो गया कि फोर्स सड़को ंपर है। यह आयडिया काम कर गया और हालात पर काबू पाने में काफी मदद मिली। अगले दिन कुछ छिटपुट घटनाएं हुईं, उन पर भी काबू पा लिया गया। इसी बीच प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लग गया तो कोई राजनैतिक दबाव भी नहीं रहा। हालांकि बरेली की जनता भी सड़कों पर तो निकली लेकिन माहौल खराब करने जैसी कोई कोशिश नहीं की।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें