जातीय भावना से ग्रसित होकर उत्पीड़न का आरोप
मृतक छात्र यशपाल सिंह के भाई हरिवंश सिंह ने कुमारगंज पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. विशुद्धानंद जातीय भावना से ग्रसित होकर उनके भाई यशपाल सिंह की तीन बार थीसिस खारिज कर दी। उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे। 20 दिन पहले उसके ताऊ का निधन होने पर घर जाने की छुट्टी तक नहीं दी थी। उसकी डिग्री रोकने की धमकी भी देते थे। छात्रों में इस बात पर भी आक्रोश है कि यशपाल ने अपनी रिसर्च से संबंधित तमाम डाटा इकट्ठा किया था।
प्रजेंटेशन से एक दिन पहले यानी 12 मई को शिक्षक ने उसे भी खारिज कर दिया, जबकि वे उसके गाइड थे। गलत डाटा तैयार होने पर पहले से बता सकते थे। शिक्षक की ओर से किए जा रहे उत्पीड़न की जानकारी उनके भाई ने उन्हें कई बार फोन पर दी। मामले में पुलिस ने शिक्षक डॉ. विशुद्धानंद के खिलाफ आत्महत्या के लिए विवश करने की धारा में मुकदमा दर्ज कर लिया है। थानाध्यक्ष रतन सिंह ने बताया कि आरोपी शिक्षक की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित की गई है।
10 सदस्यीय कमेटी करेगी उच्च स्तरीय जांच
छात्र यशपाल सिंह के आत्महत्या के मामले की जांच के लिए कुलपति ने 10 सदस्यीय कमेटी बनाई है। समिति में कुलसचिव डॉ. पीएस प्रमाणिक, निदेशक प्रशासन एवं परिवीक्षण डॉ. एके सिंह, कृषि अधिष्ठाता डॉ. प्रतिभा सिंह, छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. डीके द्विवेदी, वानिकी अधिष्ठाता डॉ. संजय पाठक, सामुदायिक विज्ञान अधिष्ठाता डॉ. साधना सिंह, सुरक्षा अधिकारी आरके सिंह, डॉ. नवाज खान, डॉ. सीएन राम, डॉ. नीरज यादव शामिल हैं।
मंगलवार की सुबह नौ बजे समिति ने कुलपति के साथ दो घंटे तक बैठक की। प्रारंभिक जांच में दोषी मिलने पर आरोपी शिक्षक को निलंबित कर दिया गया। कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने बताया कि घटना के संबंध में स्नातक, परास्नातक व पीएचडी के छात्र-छात्राओं के आईडी नंबर के साथ व्यक्तिगत जानकारी समिति दर्ज करेगी। पुख्ता सबूतों के आधार पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। निलंबन की अवधि में शिक्षक को फसल अनुसंधान केंद्र मसौधा से संबद्ध किया गया है।