बरेली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश के अनुसार जिले में ग्रीन पटाखे ही बिके। पिछले वर्ष से ज्यादा पटाखों की बिक्री हुई। व्यापार भी 50 करोड़ रुपये का रहा, लेकिन 13 साल बाद एक्यूआई दौ सौ का आंकड़ा पार नहीं कर सका। दिवाली पर शहर का एक्यूआई 192 रहा।
बरेली फायरवर्क्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कृष्णदेव सूद का दावा है कि एनजीटी के निर्देशानुसार अब ग्रीन पटाखे ही बाजार में उपलब्ध हैं। इन्हीं की बिक्री हुई। एनजीटी के आदेश के अवमानना पर इस बार पटाखा की दो बड़ी फैक्टरियों का उत्पादन ठप रहा। जिससे पटाखों की उपलब्धता कम और मांग ज्यादा होने के चलते कीमताें में तेजी रही। उप्र उद्योग व्यापार मंडल के प्रांतीय महामंत्री राजेंद्र गुप्ता के मुताबिक करीब 50 करोड़ रुपये का पटाखा कारोबार हुआ। जिसकी वजह मांग जबरदस्त होना और कीमतों में बढ़त भी रही। बावजूद इसके लोगों ने जमकर पटाखे जलाए।
क्षेत्रीय अधिकारी चंद्रेश कुमार के मुताबिक ग्रीन पटाखों में ध्वनि तीव्रता और धुएं का घनत्व सामान्य पटाखाें के सापेक्ष 30 फीसदी कम होता है। जलने की अवधि भी कम होती है। हवा में घुला प्रदूषण हर दिन धीरे-धीरे कम होगा। रिमझिम या हल्की बारिश से पूरी तरह साफ हो सकता है।
दिवाली पर आवासीय, व्यावसायिक क्षेत्र में एक्यूआई
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों पर गौर करें तो व्यावसायिक क्षेत्र के सापेक्ष आवासीय इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) सामान्य से ज्यादा रहा। आवासीय क्षेत्र राजेंद्र नगर का एक्यूआई 210 यानी सामान्य से 110 अधिक रहा। जो खतरनाक रहा। सिविल लाइंस व्यावसायिक क्षेत्र की हवा की गुणवत्ता का स्तर 180 रहा। जो 80 एक्यूआई ज्यादा रहा। छोटी दिवाली रविवार को एक्यूआई 130 और मंगलवार को 168 दर्ज हुआ।
वर्षवार दिवाली पर एक्यूआई और संभावित प्रभाव
वर्ष 2012 में 378, 2013 में 398, 2014 में 421, 2015 में 442, 2016 में 396, 2017 में 410, 2018 में 435, 2019 में 398, 2020 में 392, 2021 में 415, 2022 में 262, 2023 में 208, 2024 में 216 एक्यूआई था। बता दें कि 50 एक्यूआई तक हवा स्वच्छ, 51 से सौ तक संतोषजनक, 101 से 150 तक सावधानी, 151 से 200 तक प्रदूषित, 201 से 300 तक खतरनाक, तीन सौ के पार गंभीर, चार सौ के पार घातक होती है। ब्यूरो