बरेली। तकनीकी जानकारों के मन में यह सवाल जरूर हो सकता है कि क्या बीएस- 4 गाड़ियों के इंजन को बीएस- 6 में तब्दील किया जा सकता है? लेकिन फिलहाल कॉमर्शियल वाहनों के कई शोरूम पर खरीददारों से यही दावा किया जा रहा है। इसे उस समस्या का तोड़ माना जा रहा है जो सुप्रीम कोर्ट के 31 मार्च के बाद बीएस- 4 वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर पाबंदी लगाने से देश की ऑटोमोबाइल कंपनियों के सामने पैदा हुई है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़े लोगों के मुताबिक कॉमर्शियल वाहनों का उत्पादन करने वाली कंपनियों के देश भर में फैले शोरूम पर छोटे-बड़े लाखों ऐसे वाहनों का स्टॉक है, जिनमें बीएस-4 इंजन है। अकेले बरेली में ही कॉमर्शियल वाहनों की संख्या छह हजार से ज्यादा बताई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक कंपनियों के पास इन्हें बेचने के लिए बमुश्किल एक महीने का ही समय बचा है। वाहनों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में कई दिन लगते हैं, लिहाजा माना जा रहा है कि 20 मार्च के बाद बिकने वाले वाहनों का रजिस्ट्रेशन हो पाना मुश्किल हो सकता है। सरकार कंपनियों को राहत पहुंचाने के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को संक्षिप्त कर दे या जल्द रजिस्ट्रेशन कराने का कोई और इंतजाम कर दे तो अलग बात है। हालांकि इसके बावजूद कंपनियों और डीलरों को उम्मीद है कि जितना स्टॉक उनके पास है, उसका एक-चौथाई भी वह इस समयसीमा में नहीं निकाल पाएंगे।
कंपनियों की ओर से समस्या का तोड़ तलाश करने के लिए भी लगातार मशक्कत की जा रही है। दिल्ली में डीलरों की लगातार बैठकें बुलाई जा रही हैं। यात्री और माल ढोने वाले वाहनों पर 20 से 25 प्रतिशत तक की छूट घोषित कर दी गई है लेकिन फिर भी अरबों के घाटे से बचना आसान नहीं दिख रहा है। इस बीच ट्रांसपोर्टर्स के बीच यह भी हवा फैलनी शुरू हो गई है कि अगर समय रहते बीएस-4 गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ तो कंपनियां उन्हें अपने खर्च पर बीएस-6 में कन्वर्ट कराके देंगी। कई डीलर भी पुष्टि कर रहे हैं कि कंपनियों की ओर से उन्हें ग्राहकों को इस तरह के ऑफर देने का निर्देश दिया गया है ताकि बीएस-4 वाहनों को बेचने के लिए कुछ ज्यादा समय मिल सके। इसके बाद खरीददारों के बीच इस ऑफर का प्रचार भी शुरू कर दिया गया है ताकि उन्हें दोहरे फायदे का भरोसा दिलाकर बीएस-4 वाहन खरीदने के लिए तैयार किया जा सके।
दबाव बनाने की कोशिश था मंदी का प्रचार
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कॉमर्शियल वाहन बनाने वाली कंपनियों में ज्यादा बेचैनी का माहौल है। इनमें कई कंपनियों ने अपना उत्पादन कई महीने पहले ही कम कर दिया था लेकिन फिर भी उनके पास बीएस-4 वाहनों का भारी स्टॉक पहले से मौजूद था। सुप्रीम कोर्ट का रुख देखते हुए लोग भी इन वाहनों को खरीदने से बचने लगे थे। इसी बीच दबाव बनाने के लिए ऑटोमोबाइल सेक्टर में मंदी का प्रचार शुरू हुआ। अब जो हालात हैं, उनमें एक तरह से साफ हो गया कि ऑटोमोबाइल सेक्टर के सामने मंदी नहीं बल्कि घाटे से बचने का संकट था। अब वाहनों पर लाखों की छूट देने के बाद भी यह घाटा कितना बड़ा होगा, कंपनियां यह अनुमान नहीं लगा पा रही हैं।
कंपनियों ने बीएस-4 फ्यूल वाले कॉमर्शियल वाहनों का स्टॉक ज्यादा से ज्यादा क्लियर करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत ग्राहकों को आकर्षक छूट भी दी जा रही है। इससे ग्राहकों को काफी फायदा होगा। - रवि अग्रवाल, ऑटोमोबाइल कारोबारी
बीएस-4 कॉमर्शियल गाड़ियों पर भारी छूट दी जा रही है। बगैर किसी सीजन के ग्राहकों का बड़ा फायदा हो रहा है। यह खरीददारी का बेहतर मौका है। कंपनी से अच्छे ऑफर आए हैं। - अवनीश जैन, ऑटोमोबाइल कारोबारी