डब्ल्यूएचओ की टीम ने फरीदपुर की एक बच्ची का सैंपल जांच के लिए भेजा
फरीदपुर। गांव सब्दलपुर में डिप्थीरिया का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। 15 दिन में तीन बच्चों की मौत हो जाने से गांव में हाहाकार मचा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग ने गांव में टीकाकरण शुरू करा दिया हैै। इधर, फरीदपुर की एक बच्ची में डिप्थीरिया के लक्षण मिलने पर डब्ल्यूएचओ की टीम ने उसका सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा है।
गांव सब्दलपुर में 15 दिनों के भीतर तीन बच्चों की डिप्थीरिया से मौत हो चुकी है। ग्राम प्रधान सुदर्शन सिंह ने बताया कि नेमपाल की बेटी नेहा को गले में दर्द की शिकाययत हुई फिर तेज बुखार आ गया। फरीदपुर में इलाज कराने के दौरान उसकी मौत हो गई। गांव के ही सुभाष के बेटे बंटी को भी गले में दर्द और तेज बुखार आने पर बरेली के निजी अस्पताल में भर्ती किया गया था। पांच दिन बाद उसकी मौत हो गई। इसके कुछ दिन बाद ही मेवाराम के बेटे शिवम को भी तेज बुखार और गले में दर्द होने पर बरेली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उसे भी बचाया नहीं जा सका।
जगवीर की बेटी भावना और सुरेंद्र की 12 साल की बेटी मोनी को भी यह बीमारी हुई, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें बचा लिया। डिप्थीरिया से तीन बच्चों की मौत की जानकारी गांव वालों ने विधायक डॉ. श्याम बिहारी लाल और विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष मानवेंद्र राणा को दी। दोनों ने ही सीएमएओ से बात करके तत्काल गांव में टीम भेजने को कहा। इसके बाद कुआडांडा सीएसची की टीम ने गांव पहुंचकर टीकाकरण शुरू किया। करीब 30 बच्चों का टीकाकरण किया जा चुका है।
बच्चों की मौत डिप्थीरिया, इसे आम भाषा में गलाघोंटू भी कहते हैं, से हुई थी। इसकी पुष्टि बच्चों का इलाज करने वाले डॉक्टरों ने की है। गांव में बच्चों को टीके लगवाए जा रहे हैं। डब्लूएचओ को अभी जानकारी नहीं दी गई है। जल्द ही सूचना दे दी जाएगी। - डॉ. राजकुमार, चिकित्सा अधीक्षक सीएचसी, कुआडांडा।
फरीदपुर में आठ साल की बच्ची मिली पीड़ित
फरीदपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर नहर कोठी निवासी आठ साल की बच्ची को भर्ती कराया गया था। उसे तेज बुखार था और गला बंद होने लगा था। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वासित अली ने बच्ची का इलाज किया। तीन दिन में उसकी हालत में काफी सुधार हो गया। बच्ची के डिप्थीरिया से पीड़ित होने की जानकारी डब्ल्यूएचओ के मॉनिटर अमित को भी दे दी गई। अमित ने बताया कि बच्ची का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी के बारे में आधिकारिक तौर पर कुछ कहा जा सकता है।