बरेली। स्पोर्ट्स स्टेडियम में करीब आठ माह से सिंथेटिक ट्रैक का निर्माण चल रहा है। इस वजह से एथलीट अभ्यास नहीं कर पा रहे हैं। वे स्टेडियम जाते हैं, निर्माणाधीन ट्रैक को देखकर मायूस लौट आते हैं। स्टेडियम में अन्य सुविधाओं का भी टोटा होने की वजह से बाधा दौड़ (हर्डल), हैमर, भाला, चक्का, गोला फेंक, ऊंची कूद के खिलाड़ियों ने दूसरी राह पकड़ ली है। कुछ दूसरे शहरों में अभ्यास कर रहे हैं तो कई ने एथलेटिक्स से तौबा कर ली है।
सुविधाओं के साथ ही स्टेडियम में खेल प्रशिक्षकों का भी अभाव है। ट्रैक के काम की वजह से वहां निर्माण सामग्री फैली हुई है। इस कारण काफी कम जगह बची है। जिला एथलेटिक्स संघ के सचिव ने खिलाड़ियों को सहूलियत देने के लिए रिठौरा में 400 मीटर का ट्रैक तो बनवा दिया, लेकिन चारों ओर फसल होने की वजह से वहां सिर्फ लंबी कूद के खिलाड़ी ही अभ्यास कर पा रहे हैं। बाकी इवेंट के खिलाड़ी किसी तरह वार्मअप कर लौट जाते हैं। खिलाड़ियों के मुताबिक बाधा दौड़ का साजो-सामान उनके पास उपलब्ध नहीं है। हैमर, भाला, चक्का, गोला फेंक व ऊंची कूद के लिए जगह का अभाव है। अभ्यास के लिए दूर से आने वाले एथलीट वहीं रुकते भी हैं। इसके बाद भी वहां एथलेटिक्स की कई इवेंट के लिए जगह की व्यवस्था नहीं हो सकी है।
कई खिलाड़ी लहरा चुके परचम
रिठौरा में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने वाले कोच सचिव साहिबे आलम का काफी वक्त स्टेडियम में ही गुजरा है। तब उनके पास हर इवेंट के खिलाड़ी प्रशिक्षण लेते थे। उस समय कई खिलाड़ी हैमर थ्रो, गोला फेंक, बांस कूद (हाई जंप), डिस्कस थ्रो में राष्ट्रीय स्तर पर परचम लहरा चुके हैं। अब बीते सात साल से इन इवेंट के लिए खिलाड़ी ही नहीं मिल रहे हैं।
निर्माण पूरा होने पर मिलेगी राहत
साहिबे आलम ने बताया कि स्टेडियम का निर्माण पूरा होने पर ही खिलाड़ियों को राहत मिलेगी। उनके पास आने वाले कई खिलाड़ियों ने जगह के अभाव में अपने इवेंट तक बदल लिए हैं। हालांकि, उन्होंने संतोष जताते हुए कहा कि जब स्टेडियम बनकर तैयार हो जाएगा तो सारी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध होंगी। संवाद