अगर सब कुछ ठीक रहा तो बहुत जल्द काफी कम दामों पर सौलर पैनल उपलब्ध होंगे। ऐसा संभव होगा सस्ते मैटेरियल से बने सोलर सेल से। फिजिक्स के वैज्ञानिकों के मुताबिक अभी तक पैनल के सेल सिलिकॉन से बने होते हैं, जो काफी महंगी होती है, लेकिन अब सस्ते मैटेरियल से सेल बनाने में कामयाबी मिल गई है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) सौर ऊर्जा की लागत कम करने के इस प्रोजेक्ट में रुहेलखंड विवि के फिजिक्स विभाग के हेड डॉ. सुधीर कुमार थ्योरीकल भाग में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने पेंटनरी अलाउज मैटेरियल ( कॉपर, कैडमियम, जिंक, टिन और सल्फर का मिश्रण) से पैनल के सेल बनाने में सफलता हासिल कर ली है। डॉ. सुधीर ने बताया कि डीएसटी ने सस्ते सोलर पैनल बनाने के प्रोजेक्ट का काम अलग-अलग यूनिवर्सिटी को दे रखा है, जिसमें रुहेलखंड विश्वविद्यालय का फिजिक्स विभाग भी शामिल है। अगले साल प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा।
सिल्वर और आर्सेनिक पर होगा शोध
डॉ. सुधीर को डीएसटी से ‘इलेक्ट्रॉनिक प्रॉपर्टीज ऑफ ट्रांसपेरेंट्स कंडक्टिंग ऑक्साइड’ का प्रोजेक्ट मिला है। इस प्रोजेक्ट के तहत उन्होंने कैडमियम की 25, 50 और 75 फीसदी मात्रा मिलाकर रिएक्शन देखा। इसमें कैडमियम की मात्रा बढ़ाने से तीस फीसदी एनर्जी पैदा करने की क्षमता बढ़ी। अब वह सिल्वर और आर्सेनिक मैटेरियल पर शोध करेंगे। इसी टॉपिक पर उनका एक रिसर्च पेपर अमेरिका के फिजिकल रिव्यू बी जनरल में भी प्रकाशित हो चुका है।
डाटा विश्लेषण को एचपीसी का प्रयोग
सुपर कंप्यूटर की तरह डाटा का विश्लेषण करने के हाई परफार्मेंस कंप्यूटिंग मशीन (एचपीसी) का प्रयोग किया गया है। डॉ. सुधीर बताते हैं कि यह मशीन एक सेेकेंड में 345 गेगा फ्लोपस की स्पीड से डाटा की गणना कर सकती है। 64 प्रोसेसर वाली यह मशीन सामान्य कंप्यूटर की तुलना में कई सौ गुना तेजी से डाटा रीड कर उनका विश्लेषण कर सकती है।