प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसीएम फर्स्ट को सौंपा
बरेली। एक जनवरी से जीएसटी की दरें बढ़ जाएंगी। व्यापारी इसका विरोध कर रहे हैं। पश्चिमी उप्र संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसीएफ फर्स्ट प्रदीप रमन को सौंपा।
व्यापार मंडल के संयोजक सुनील खत्री ने कहा कि एक जनवरी से कपड़ा, जूता-चप्पल और स्टेशनरी समेत कई वस्तुओं पर जीएसटी की दरें पांच फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी कर दी जाएंगी। यह निर्णय अव्यावहारिक और अप्रत्याशित है। इससे व्यापारियों के साथ-साथ उपभोक्ता भी प्रभावित होंगे। सरकार के जीएसटी की दरों में वृद्धि के निर्णय से व्यापारियों, उपभोक्ताओं और उद्यमियों में रोष है। व्यापारी शुरू से ही इसका विरोध कर रहे हैं लेकिन इसके बाद भी सरकार फैसले पर पुनर्विचार नहीं कर रही है। इस मौके पर युवा महानगर अध्यक्ष सत्यम सक्सेना, रवि गुप्ता, शांतनु शर्मा, नकुल यादव, सौरभ यादव, शिव कुमार, गणेश शंकर सिंह, अखिल दिवाकर, अवनीश गंगवार, आशीष तिवारी, अंशुल, अतुल राठौर आदि मौजूद रहे।
जीएसटी की दरें बढ़ेंगी तो सबसे अधिक प्रभावित मध्यम और गरीब वर्ग होगा, इसलिए दरें बढ़ाना ठीक नहीं है। कई छोटे उद्योग भी खत्म हो जाएंगे। सरकार को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। - गौतम सेठी
पिछले दो साल से तो व्यापारी कोविड की मार ही झेल रहे हैं। अभी इससे उबरे ही हैं तो जीएसटी की दरें बढ़ाकर उन्हें फिर से घाटे की ओर धकेला जा रहा है। इसकी मार सिर्फ दुकानदारों पर ही नहीं छोटे उद्यमियों और ग्राहकों पर भी पड़ेगी। - नरेंद्र गुप्ता
जीएसटी बढ़ने से टी-शर्ट, जींस, शर्ट आदि ऐसे सभी उत्पाद जो एक हजार के अंदर मिल रहे हैं, महंगे हो जाएंगे। इसका सीधा असर मध्यम और गरीब वर्ग के उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। सरकार को दरें बढ़ाने का फैसला वापस लेना चाहिए। - दर्शनलाल भाटिया
व्यापारी जीएसटी बढ़ाने के कतई पक्ष में नहीं हैं। पहले ही कह चुके हैं कि सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए। अभी जीएसटी बढ़ाने का सही समय नहीं है। जीएसटी की दरें बढ़ाईं तो इससे बाजार में मंदी का दौर शुरू हो जाएगा। - राजेश छाबड़ा