नवाबगंज। किसानों को लगभग 70 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान करने के लिए ओसवाल चीनी मिल का मूल्यांकन शुरू हो गया है। बृहस्पतिवार को पुणे से आई वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट की तीन सदस्यीय टीम ने जांच की। इसकी रिपोर्ट डीएम और जिला गन्ना अधिकारी को दी जाएगी।
ओसवाल चीनी मिल पर किसानों का लगभग 70 करोड़ रुपये गन्ना भुगतान बकाया है। इस कारण किसानों ने मिल को गन्ना देना बंद कर दिया, जिससे मिल बंद हो गई। प्रशासन ने मिल को नीलाम कर किसानों का भुगतान कराने का निर्णय किया है। इस मामले में बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र के पुणे की वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट की तीन सदस्यीय टीम चीनी मिल परिसर पहुंची। उनके साथ ज्येष्ठ गन्ना निरीक्षक मणिकांत और सहकारी गन्ना समिति की सचिव मेघा चतुर्वेदी मौजूद रहीं। सहकारी गन्ना समिति के ज्येष्ठ गन्ना निरीक्षक ने बताया कि टीम ने शुगर प्लांट और मशीनरी का मूल्यांकन किया है। इसकी रिपोर्ट डीएम और जिला गन्ना अधिकारी को दी जाएगी। इसके बाद अधिकारियों के आदेशानुसार कार्यवाही होगी। किसानों को गन्ना भुगतान हर हाल में कराया जाएगा।
1998 में शुरू हुई थी पेराई - नवाबगंज को यह मिल 1996 में पूर्व मंत्री भगवत सरन गंगवार की मांग पर पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने दी थी। ओसवाल मिल ने 1998 में पहला पेराई सत्र शुरू किया था। वर्ष 2023-24 में मिल पर किसानों का 107 करोड़ 24 लाख रुपये बकाया था। किसानों के विरोध के बाद मिल ने 91 करोड़ 64 लाख रुपये का भुगतान किया। इसमें 15 करोड़ 64 लाख रुपये शेष रह गए। सत्र 2024-25 में मिल ने 39 करोड़ 45 लाख रुपये का गन्ना खरीदा। इसका भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। इसपर ब्याज भी जुड़ चुका है। अब लगभग 70 करोड़ रुपये बकाया हैं।
वर्जन,
तीन सदस्यीय टीम चीनी मिल गई थी और वहां उन्होंने रिपोर्ट बनाई है। रिपोर्ट को देखने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएंगी।- दिलीप कुमार सैनी, जिला गन्ना अधिकारी