पीलीभीत व बीसलपुर रोड की पॉश कॉलोनियों में रहने वाले गुर्गे अक्सर किसी न किसी बहाने जेल में अशरफ से मिल लेते थे। उससे आदेश मिलने के बाद कॉल की जाती थीं, साथ ही कुछ लोगों को उससे मिलाने का इंतजाम भी किया जाता था।
कई बार दिखीं गाड़ियां और गुर्गे, नहीं हुई कार्रवाई
अतीक और अशरफ के जेल आने के बाद शहर में कई बार इस गिरोह की काले रंग की एक जैसे डिजिट की गाड़ियां दिखाई दी थीं। बजरंग ढाबे के पास ऐसी ही गाड़ियों से आए हथियारबंद लोग बहस के बाद फायरिंग करके फरार हो गए थे। चार मार्च 2022 को मौसेरी बहन के साथ आ रहे साड़ी कारोबारी से ऐसी ही गाड़ियों में बैठे लोगों ने मारपीट की थी। महिला ने लूट का भी आरोप लगाया। इस मामले में अतीक के गुर्गों का नाम आया पर कार्रवाई नहीं हुई।
एक नेता की मदद से रिश्तेदार ने बनाया नेटवर्क
अशरफ के बरेली जेल में शिफ्ट होने के बाद ही उसका एक रिश्तेदार युवक भी बरेली आ गया। बताते हैं कि अतीक अहमद के कहने पर एक नेता ने उसे बरेली में रहने के लिए मदद की। फाइक एनक्लेव में एक रिटायर्ड अधिकारी के खाली मकान को उसे किराए पर दिलाने और यहां रिहाइश के संसाधन जुटाने में मदद की। बाद में इसी रिश्तेदार युवक ने अशरफ का बरेली में नेटवर्क खड़ा किया।
प्रयागराज से आने वाले लोगों को अशरफ से मिलाने और उसके इशारे पर धंधा चलाने का काम इसी युवक की जिम्मेदारी थी। नेता के परिवार की युवती से उसके प्रेमप्रसंग की चर्चा भी खूब रही। बाद में इसी परिवार की एक लड़की से उसकी शादी तय की गई। चित्रकूट जेल कांड के बाद युवक की गतिविधियां सीमित हो गई। उमेश पाल हत्याकांड के बाद से वो लापता है। बरेली की एजेंसियां गतिविधियों पर नजर रख रही हैं, प्रयागराज से इशारा मिलते ही गिरफ्तारियां की जा सकती हैं।
बरेली रेंज के आईजी डॉ. राकेश कुमार सिंह बताया कि अशरफ मामले में कार्रवाई प्रयागराज में हो रही जांच के स्तर पर ही आगे बढ़ेगी। वहां के अधिकारियों से हम संपर्क में हैं, जो मदद मांगी जा रही है वो दी जा रही है।