बरेली। 1990 से पहले ही कश्मीर में कश्मीरी हिंदुओं को भगाने के लिए मार काट शुरू हो गई थी। वहां से जान बचाकर लोगों ने देश के कई राज्यों में पनाह ली। खौफ में जी रहे विस्थापित हुए लोगों को उत्तर प्रदेश सरकार ने 6 सालों तक रिलीफ फंड दिया फिर बंद कर दिया। करीब 24 सालों से लगातार कश्मीरी हिंदू प्रदेश सरकार से रिलीफ फंड की गुहार लगा रहे हैं लेकिन उस पर अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।
साल 1989 से 1990 के दरम्यान कई परिवार बरेली पहुंचे थे। कुछ लोग सरकारी नौकरी में थे, लिहाजा उन्होंने नियमानुसार बिगड़ते माहौल को देखते हुए ट्रांसफर ले लिया। वहीं, कई ऐसे परिवार भी थे, जिन्होंने विषम परिस्थितियों को देखते हुए कश्मीर में अपना जमा-जमाया व्यापार छोड़कर भागे और बेरोजगार हो गए। नीलकंठ धाम कॉलोनी निवासी हेमंत निजावन ने आपबीती बताते हुए कहा, ऐसे लोगों की मदद के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने गुजर बसर के लिए कश्मीर विस्थापितों को छह सौ रुपये रिलीफ फंड देना शुरू किया। करीब छह साल तक रिलीफ फंड मिला लेकिन फिर अचानक फंड मिलना बंद हो गया। बताया कि वे 96 से अब तक करीब 24 सालों से रिलीफ फंड हासिल करने के लिए दौड़ लगा रहे हैं। कई बार प्रशासन को भी प्रार्थना पत्र दिया लेकिन अभी तक न ही कोई जवाब मिला और न ही फंड। बताया कि फंड बंद होने के बाद उन्होंने कपड़े के कैरी बैग का छोटा सा व्यवसाय शुरू किया लेकिन परिवार के ही कई सदस्य 30 सालों से किराए के घर में गुजर बसर कर रहे हैं।
दो बार सहना पड़ा विस्थापन का जख्म 30 सालों से किराए पर रह रहा परिवार
जाटव पुरा निवासी सुरेंदर निजावन के परिवार ने दो बार विस्थापन का दर्द सहा। उन्होंने बताया कि उनका पैतृक निवास मुजफ्फराबाद में था। दादा जमींदार थे लेकिन बंटवारा के दौरान वे लोग मुजफ्फराबाद की विरासत छोड़कर कश्मीर के गोपजी बाग में घर बना लिया। लेकिन 1989 में ही उन्हें फिर कश्मीर से निकल जाने का फरमान कश्मीरी मुसलमानों ने सुना दिया। तब वे अपना परिवार छोड़कर बरेली आए। बताया कि वे दो बार विस्थापित होने से आर्थिक तंगी हो गई। कुछ दिनों किराए पर बिहारीपुर में रहे फिर जाटवपुरा में शिफ्ट हो गए। पिछले 30 सालों से किराए पर ही गुजर-बसर कर रहे हैं। कहा, उन्होंने भी रिलीफ फंड के लिए आवेदन किया लेकिन सुनवाई नहीं हुई। करीब साल भर पहले कश्मीर सरकार से विस्थापितों को रिलीफ फंड मिलने की जानकारी मिली। जिसे लेने वे कश्मीर गए लेकिन वहां हजारों रुपये की घूस मांग ली गई।