सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह के विधानसभा क्षेत्र में बहने वाली अरिल नदी को पुनर्जीवित करने के लिए सर्वे कराया जा रहा है। अब तक 75 किलोमीटर तक सर्वे हो चुका है। सोमवार को यहां सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता एके सिंह निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने बताया कि अरिल नदी में जल्द ही रामगंगा से पानी छोड़कर पुनर्जीवित किया जाएगा।
टीम के साथ पहुंचे सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता एके सिंह ने बरेली की सीमा से सटे गुलड़िया समेत आसपास के कई गांवों में अरिल नदी के एरिया का निरीक्षण किया। सर्वे करने वाली टीम को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। प्रमुख अभियंता ने कहा कि सर्वे पूरा होने के बाद अरिल को पुनर्जीवित करने के लिए उसकी खुदाई की जाएगी। बता देें कि एक दशक पहले तक अरिल का पानी बिल्कुल साफ-सुथरा था। अब भूमाफिया और दबंग नदी के बडे भूभाग पर कब्जा कर चुके हैं। नदी में आने वाले पानी को भी रोक दिया गया है, जिससे यह नदी विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई। दबंग जगह-जगह पक्के निर्माण कराकर नदी की जमीन पर खेती भी कर रहे हैं। सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने बरेली बदायूं और संभल में विभागीय इंजीनियरों को नदी की जमीन का सर्वे कर फिर जीवित करने के निर्देश दिए थे। नदी की पैमाइश राजस्व रिकार्ड के अनुसार की जा रही है।
46 गांवों से गुजरती है अरिल नदी
अरिल संभल से बरेली की ओर आती है। बरेली के आंवला बार्डर पर रामपुर की ओर से आने वाला छुइया नाला भी इसी में मिलता है। आंवला में यह 46 राजस्व गांवों से गुजरती है। बरेली में 60 किमी और बदायूं में 65 किमी नदी की लंबाई है। रामपुर की ओर से आने वाली पीलिया नदी भी इसी अरिल नदी में ही विलीन हो गई। महाभारतकालीन लिलौर झील भी इस नदी के पानी से ही सदानीरा रहती थी।