बरेली। श्री गंगाजी महारानी मंदिर बताए जा रहे भवन को खाली कराने की प्रक्रिया छह घंटे तक चली। पहले ठेलियों से वाहिद अली का सामान हटवाया गया। इसके बाद प्रशासन ने मजदूर लगाकर भीतर से अन्य गैरजरूरी सामान भी हटवा दिया। इसके बाद भवन को सील कर दिया गया। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी कराई गई है, ताकि किसी तरह का विवाद होने पर इसका उपयोग किया जा सके।
भवन खाली कराए जाने के दौरान हिंदूवादी संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी वहां पहुंच गए। उनको भवन में घुसने से रोकने के लिए पुलिस को सख्ती बढ़ानी पड़ी। इसके बाद भी किसी ने भवन पर भगवा झंडा लगा दिया गया। भवन खाली कराने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले ही पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया। अंदर से लेकर बाहर मुख्य सड़क तक पुलिसकर्मी आंसू गैस के गोलों सहित तैनात रहे। भवन में रहने वाले वाहिद अली के परिवार को भी समझाया गया।
भवन को खाली करने का सिलसिला सुबह 10 बजे से शुरू हुया। यहां वाहिद अली के बेटों सहित परिवार के 14 सदस्य रहते थे। भवन के मंदिर होने का दावा करने वाले राकेश और अखिल भारतीय हिंदू महासभा के अध्यक्ष बृजेश पाठक ने अंदर प्रवेश करने की कोशिश की। इस बीच उनकी पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों से नोकझोंक भी हुई। प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन के बाद दोनों दावेदार मौके से चले गए। शाम चार बजे अधिकारियों ने भवन को खाली कराकर उसे सील कर दिया।
छलका साजिद का दर्द
वाहिद अली के बेटे साजिद ने कहा कि प्रशासन ने उनको समय नहीं दिया। सुबह सोकर उठते ही पुलिस घर में घुस आई और भवन खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
बकाया है 1.52 लाख रुपये गृहकर
विवादित भवन पर नगर निगम का 1.52 लाख रुपये से अधिक का गृहकर बकाया है। वर्ष 1905 में यह भवन बनकर तैयार हुआ था। इससे पहले यहां ताड़ीखाने का संचालन होता था। वर्ष 1956 से भवन में सहकारी समिति का संचालन किया जा रहा था। इसके बाद वाहिद अली को भवन की चौकीदारी दे दी गई थी।
दावा : जल्द शुरू की जाएगी पूजा
नाथ नगरी सुरक्षा समूह बरेली के संयोजक दुर्गेश कुमार गुप्ता का कहना है कि 250 वर्ष पुराने इस मंदिर परिसर को मुक्त कराया गया है। अब शनिवार को पवित्र गंगाजल से मंदिर परिसर का शुद्धिकरण किया जाएगा। इसके बाद यहां पूजा-अर्चना शुरू की जाएगी। अखिल भारतीय हिंदू महासंघ के मंडल अध्यक्ष पंकज पाठक भी शुक्रवार को मौके पर पहुंचे। उन्होंने भी डीएम से मंदिर परिसर को मुक्त कराने की मांग की थी।
अमर उजाला ब्यूरो