बरेली। एक ओर विजेंदर सिंह, मैरीकॉम, लवलीन व अमित पंघाल जैसे खिलाड़ी बॉक्सिंग में देश का गौरव बढ़ा रहे हैं, वहीं बरेली मंडल में इस खेल का हाल बुरा है। मंडल में सिर्फ बदायूं में ही बॉक्सिंग कोच है। सुविधाएं न होने से कई खिलाड़ियों ने मेरठ का रुख कर लिया है। बरेली के साथ ही बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर में नाममात्र के खिलाड़ी ही प्रशिक्षण ले रहे हैं।
बीते दिनों महिला वर्ग की प्रदेश स्तरीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता के लिए शहर के स्पोर्ट्स स्टेडियम में जिला व मंडल स्तर के चयन के लिए ट्रायल आयोजित किए गए थे। जिला व मंडल स्तर पर बरेली की ही एक खिलाड़ी ने हिस्सा लिया। मंडल स्तरीय ट्रायल में बदायूं, पीलीभीत व शाहजहांपुर से कोई भी खिलाड़ी नहीं आया।पुरुष वर्ग के ट्रायल में भी ऐसा ही हाल दिखा।
बरेली के स्पोर्ट्स स्टेडियम में लंबे समय से कोच न होने की वजह से खिलाड़ियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। अधिकारियों की अनदेखी के कारण अभी भी रिंग खुले में ही रखी हुई है। आरएसओ जितेंद्र यादव ने बताया कि लंबे समय से कोच के न आने को लेकर नोटिस भेजा गया है। नया कोच तैनात करने की मांग भी की गई है। अप्रैल 2025 तक नए कोच की तैनाती होने की उम्मीद है। फिलहाल एक सीनियर की देखरेख में खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं।
शाहजहांपुर : बिना प्रशिक्षक कर रहे अभ्यास
शाहजहांपुर में बॉक्सिंग के लिए कोई सुविधा मौजूद नहीं है। लंबे समय से यहां के किसी खिलाड़ी ने पदक हासिल नहीं किया है। जो गिने-चुने खिलाड़ी हैं वह भी प्रशिक्षक के अभाव में ठीक तरीके से अभ्यास नहीं कर पा रहे। कई बार मांग के बावजूद कोच की तैनाती नहीं हुई है।
बदायूं : 25 खिलाड़ी ले रहे प्रशिक्षण
मंडल के अन्य जिलों की तुलना में बदायूं की स्थिति थोड़ी बेहतर है। स्टेडियम में बॉक्सिंग के कोच रोजना 25 खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहे है। खिलाड़ियों के अनुसार प्रशिक्षक उन्हें बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए तैयार कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने कई पदक भी जीते हैं।
पीलीभीत : कोच नहीं, उपकरण भी गायब
गांधी स्टेडियम में न तो कोई उपकरण है और न ही कोच मौजूद है। एक खिलाड़ी ने बताया कि लंबे समय से कोच न होने के कारण अंत में उसने अपना खेल ही बदल दिया। उसके कई साथी या तो दूसरे खेलों का प्रशिक्षण ले रहे हैं या फिर उन्होंने अभ्यास के लिए मेरठ का रुख कर लिया है।
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