बरेली। राइफल क्लब में बदहाली का आलम इस कदर गहरा गया है कि खिलाड़ियों का भविष्य अब दांव पर नजर आ रहा है। एक तरफ जहां सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों के बजट और नई योजनाओं का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ शहर का यह क्लब बदहाल होता जा रहा है। वर्तमान में स्थिति यह है कि क्लब की तीरंदाजी और 20 मीटर की शूटिंग रेंज पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। बारिश के मौसम में यह पूरा परिसर किसी मैदान के बजाय तालाब में तब्दील हो जाता है। जलभराव की इस समस्या के समाधान के लिए खिलाड़ियों ने कई बार जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन आश्वासन के सिवा उन्हें अब तक कुछ हासिल नहीं हुआ है।
समस्या केवल जलभराव तक सीमित नहीं है। 12 बोर शूटिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली टैप मशीन आज भी खुले आसमान के नीचे असुरक्षित तरीके से लगी हुई है। कायदे से इसे एक व्यवस्थित ट्रेंच में स्थापित किया जाना चाहिए था, ताकि खिलाड़ी सुरक्षित और बेहतर माहौल में अभ्यास कर सकें। हैरानी की बात यह है कि इस ट्रेंच के निर्माण के लिए पिछले साल नवंबर में ही प्रस्ताव पास किया जा चुका है, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी ईंट तक नहीं रखी गई है। फिलहाल करीब 20 खिलाड़ी इसी बदहाली के बीच 12 बोर का प्रशिक्षण लेने को मजबूर हैं।
खिलाड़ियों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि इसी महीने के अंत में प्री-स्टेट शूटिंग प्रतियोगिताएं शुरू होने वाली हैं। यहां अभ्यास की जगह खिलाड़ी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं।
- फाइलों में कैद हुए 12 लाख के हथियार
राइफल क्लब में नए हथियारों की आमद का इंतजार अब लंबा होता जा रहा है। करीब ढाई साल पहले क्लब में आधुनिक हथियारों की कमी को दूर करने के लिए छह नए हथियारों का प्रस्ताव तैयार किया गया था, जिसकी अनुमानित लागत 12 लाख रुपये तय की गई थी। अधिकारियों के अनुसार, इस योजना के तहत .22 बोर की दो राइफल, दो पिस्टल और दो एयर राइफल क्लब के बेड़े में शामिल की जानी थीं, ताकि स्थानीय खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए आधुनिक संसाधन मिल सकें। हालांकि, बजट प्रस्ताव भेजे जाने के महीनों बाद भी प्रक्रिया कागजों से बाहर नहीं निकल पाई है। विभाग की ओर से खिलाड़ियों को दिलासा दी जा रही है कि मार्च माह के अंत तक नए हथियार क्लब को मिल जाएंगे।