फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अपनी शक्ति को पहचानकर बेटियां बनें ‘अपराजिता’

विज्ञापन
अपनी शक्ति को पहचानकर बेटियां बनें ‘अपराजिता’ - फोटो : अमर उजाला, बरेली
विज्ञापन

- अमर उजाला अपराजिता ‘100 मिलियन स्माइल्स’ के तहत निबंध प्रतियोगिता में छात्राओं ने बेबाकी से रखी अपनी राय

बरेली। अपनी सुरक्षा का जिम्मा हमें खुद उठाना होगा। कोई परेशान करे तो खामोश रहने के बजाए उसका मुंहतोड़ जवाब देना होगा। अमर उजाला के ‘अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स’ मुहिम के तहत सोमवार को पीलीभीत बाईपास स्थित जिंगल बेल्स स्कूल में नारी सुरक्षा विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में छात्राओं ने यह विचार व्यक्त किए। उन्होंने अपने लेख में मौजूदा दौर में महिलाओं की उपलब्धि के साथ-साथ नारी सुरक्षा के सवाल को प्रमुखता से रेखांकित किया।
विज्ञापन

प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली कक्षा 11वीं की छात्रा मल्लिका वर्मा ने अपने निबंध में शिक्षित होने का महत्व बताने के साथ आत्मरक्षा के गुर सीखने की बात कही। उन्होंने लिखा कि महिलाएं दिन पर दिन तरक्की कर रही हैं, लेकिन अब भी वे शोषण का शिकार हो जाती हैं। इसके लिए उन्हें सतर्क रहने की जरूरत है। लड़कियों को आत्मरक्षा के गुर सीखने चाहिए ताकि मौका पड़ने पर वह गलत नीयत रखने वालों का मुंहतोड़ जवाब दे सकें। प्रतियोगिता में द्वितीय रहीं 11वीं की तनिष्का झा ने महिला हेल्पलाइन और तकनीक की दुनिया में खुद को कैसे सुरक्षित रखें, इस पर फोकस किया। उन्होंने लिखा कि सोशल मीडिया के जरिये कई लड़कियां शोषण का शिकार हो जाती हैं। तृतीय स्थान पाने वाली 10वीं की फरहा नाज का मानना है कि दूसरों पर निर्भर रहने के बजाए लड़कियां अपनी सुरक्षा का जिम्मा खुद उठाएं। अगर कोई परेशान करे तो खामोश रहने के बजाए उसका मुंहतोड़ जवाब दें। इनके अलावा बेहतर प्रदर्शन करने वाली छात्रा 10वीं की नीम आदिल, 9वीं की अर्शमा फातिमा, 10वीं की श्रेया गुप्ता, स्नेहा जायसवाल को अमर उजाला की ओर से प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
हेल्पलाइन नंबर की जानकारी दी
इस मौके पर प्रधानाचार्य ने छात्राओं को डायल 100, 181, 1090 हेल्पलाइन की जानकारी दी। साथ ही गुड टच और बैड टच के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि बेटियां खुद को कभी कमजोर न समझें। नारी से ज्यादा शक्तिशाली इस धरती पर कोई नहीं, बस उसे अपनी शक्ति पहचानने की जरूरत है। उन्होंने प्रत्येक छात्रा को भारतीय संस्कृति को संजोते हुए खुद को सबल बनाने का सुझाव दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें