बरेली। महीने भर पहले तापमान में शुरू हुई गिरावट के बाद संक्रमण की दूसरी लहर की आशंका से शासन, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा था। मगर, अब जबकि न्यूनतम तापमान तीन डिग्री तक पहुंच रहा है फिर भी संक्रमण के मामले बढ़ने के बजाय कम हो रहे हैं, इससे स्वास्थ्य विभाग के अफसर हैरान हैं। चिकित्सकों का कहना है कि करीब 14 हजार संक्रमित मिल चुके हैं। उनके संपर्क में आए तमाम ऐसे भी संक्रमित हैं जिन्हें ट्रेस नहीं किया जा सका है। ऐसे में हर्ड इम्युनिटी बनने की आशंका है।
सर्दियों में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर यानी संक्रमितों की तादाद बढ़ने की आशंका शोधकर्ताओं ने जताई थी। दिल्ली, महाराष्ट्र, अहमदाबाद और राजस्थान में फिर से संक्रमण के प्रतिदिन हजारों मामले ट्रेस होने से केंद्र सरकार ने अलर्ट जारी कर दिया था। लॉकडाउन और रात्रि कर्फ्यू लगाए जाने का निर्णय जिलाधिकारियों को स्वविवेक से लेने को कहा गया था। आम लोग भी लॉकडाउन की आशंका से दिल्ली और अन्य संवेदनशील माने जा रहे इलाकों से लौटने लगे थे। बरेली में भी इसका असर साफ दिखाई देने लगा था। नवंबर में संक्रमण के मामलों में बढ़त भी दर्ज की गई थी। एक निर्धारित संख्या में सैंपलिंग में जहां 25 से 30 संक्रमित मिल रहे थे, वह तादाद 70 तक जा पहुंची थी। मगर दिसंबर शुरू होने के बाद मामले घटने लगे। हफ्ते भर से 15 से 30 संक्रमित ही मिल रहे हैं। शोध के दावों से इतर कम हो रहे संक्रमण ने कोरोना काल की शुरुआत से ही इस पर नजर रखने वाले चिकित्सकों को हैरान कर दिया। उनका कहना है कि अब सैंपलिंग बढ़ी है, मगर पहले यह स्थिति नहीं थी। इसलिए तमाम लोग संक्रमित भी हुए और स्वस्थ हो गए। एंटीबॉडी बनने से वह दोबारा संक्रमण की जद में चार-पांच महीने से पहले नहीं आ सकेंगे। आशंका जताई है कि जिले में हर्ड इम्युनिटी बनने से यह स्थिति है, इससे आने वाले समय में हालात बेकाबू हो सकते हैं।
दोबारा संक्रमित हुए तो पड़ेगा भारी
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विनोद पागरानी के मुताबिक सर्दियों में संक्रमण के मामले बढ़ने की आशंका थी मगर इनमें गिरावट दर्ज हो रही है। इसे फिलहाल भले ही अच्छा संके त माना जा रहा हो, लेकिन यह एक बड़ी विपदा का संकेत दे रहा है, क्योंकि अगर हर्ड इम्यूनिटी बनी होगी तो संक्रमण की दूसरी लहर में जो भी चपेट में आएंगे वे गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं। जो लक्षण युक्त संक्रमित रहे हैं उनमें इम्युनिटी अधिकतम चार से पांच माह तक ही रहेगी। रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं हुई होगी, इसलिए हालात और बेकाबू होने की आशंका है।
तापमान का नहीं दिख रहा कोई असर
वायरोलॉजिस्ट (विषाणु विशेषज्ञ) डॉ. राहुल गोयल के मुताबिक कोविड-19 वायरस पर तापमान का क्या प्रभाव पड़ता है, यह जानने के लिए शोध चल रहे हैं। इनमें भिन्न-भिन्न परिणाम सामने आ रहे हैं। उम्मीद थी कि गर्मियों में संक्रमण कम होगा, मगर मामले रोजाना तीन सौ के पार जा पहुंचे। सर्दियों में बढ़ने की आशंका थी, मगर तीन हजार से ज्यादा सैंपल में 15-20 संक्रमित ही मिल रहे हैं। ऐसे में चर्चा है कि वायरस की बदल रही स्ट्रेन में किसी पर तापमान प्रभावी है और किसी पर बेअसर। कहा, अगर संक्रमण कम हो रहा है तो जनवरी में स्थिति साफ होने के आसार हैं।
अतिसंवेदनशील इलाकों में घटे मामले
राजेंद्रनगर, इंदिरानगर, इज्जतनगर, सुभाषनगर, मढ़ीनाथ, मौलानगर समेत शहर के कई इलाके अतिसंवेदनशील माने जा रहे थे। इन्हें हॉटस्पॉट भी बनाया गया था। यहां काफी तादाद में सैंपलिंग की गई है मगर अब प्रतिदिन एक-दो ही मामले सामने आ रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि इन इलाकों में हर्ड इम्युनिटी की स्थिति होने के चलते नए मामले सामने नहीं आ रहे होंगे। एसीएमओ डॉ. अशोक कुमार के मुताबिक शहर के सभी इलाकों में सैंपलिंग हो रही है, मगर संक्रमण के मामले अब कम हो रहे हैं। फिर भी लोगों को सचेत रहने की जरूरत है क्योंकि बरेली कोरोना मुक्त नहीं हुआ है।