बरेली। आला हजरत और अजमेर दरगाह के बीच अरसे से वैचारिक मतभेद रहे हैं। ऐसे में आला हजरत परिवार के सदस्य व आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां का अजमेर शरीफ के पदाधिकारियों से मिलने जाना चर्चा का विषय बना हुआ है। उनके दौरे को दोनों दरगाहों के बीच की खटास को मिटाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
दोनों दरगाह के बीच का विवाद दो दशक पहले तब गर्माया, जब ख्वाजा की दरगाह के खिलाफ पोस्टर जारी किया गया। इस पर जारीकर्ता के रूप में आला हजरत परिवार के एक बुजुर्ग का नाम छपा था। इस विवाद ने दोनों दरगाहों के बीच दरार पैदा की। बाद में पोस्टर फर्जी साबित हुआ, दोनों दरगाहों के संबंध बिगड़ गए।
दूसरा विवाद चार साल पहले अजमेर दरगाह पर आला हजरत का लिखा सलाम पढ़ने पर हुआ। दो साल पहले अजमेर दरगाह पर लोगों ने बरेलवी मसलक के नारे लगा दिए। इससे भी नाराजगी बढ़ीं। मौलाना तौकीर रजा खां ने कहा कि अब दोनों दरगाहों के बीच कोई विवाद नहीं है। पहले जो हुआ, उसका हल निकाल लिया गया। मौजूदा मुलाकात दरगाह के सर्वे पर वार्ता के लिए है।
विवादों के बीच मौके-मौके पर दोनों दरगाह के लोगों का एक-दूसरे के यहां आना-जाना लगा रहा। आला हजरत के उर्स की पूर्व संध्या पर मजार शरीफ के गुस्ल की रस्म अदा की जाती है। इसमें पेश होने वाला संदल और चादर ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह से ही आती है। वहां के गद्दीनशीन इसे लेकर आते हैं और यहां के दरगाह प्रमुख और सज्जादा के साथ गुस्ल की रस्म संपन्न कराते हैं। वहीं गरीब नवाज के उर्स में आला हजरत दरगाह से भी चादरें पेश होने जाती हैं।