साल भर या तो बजट का रोना या फिर कृत्रिम अड़ंगों के चलते काम लटका रहा। अब वित्तीय वर्ष के अंतिम महीने में करोड़ों रुपये खर्च किया जाना है। खासतौर पर लोकनिर्माण विभाग में करोड़ों का वारा-न्यारा होगा। इतने कम समय में सड़क के जिन कामों में करोड़ों रुपये बहाए जाएंगे, उनकी गुणवत्ता को लेकर जानकारों को संदेह होने लगा है।
वित्तीय वर्ष 2014-15 में शासन ने 138 सड़कों की मरम्मत के लिए फरवरी में पीडब्ल्यूडी को 28.4420 करोड़ का बजट जारी किया था। पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड, निर्माण खंड और निर्माण खंड एक को 244.080 किलोमीटर की सड़कों पर ये बजट 31 मार्च तक हर हाल में खर्च करना है। पिछले माह के आखिरी सप्ताह तक सड़क मरम्मत की टेंडर प्रक्रिया पूरी हो पाई। इस दौरान स्वीकृत इस्टीमेट और टेंडर प्रक्रिया में रखे गए सड़क मरम्मत के आइटमों के अंतर पर काफी विवाद हुआ। इस वजह से टेंडर प्रक्रिया दो बार आगे बढ़ानी पड़ी। होली के अवकाश में एक सप्ताह और निकल गया। अभी तक अधिकांश सड़कों की मरम्मत का काम प्रारंभ तक नहीं हुआ। वित्तीय वर्ष के आखिरी महीने में पूरा बजट खर्च करने की मजबूरी है। अब बचे हुए 22 दिनों में सड़क मरम्मत के नाम पर भारी भरकम गड्ढों में मिट्टी भरने के बाद उस पर बजरी और कोलतार छिड़ककर खानापूरी करने की तैयारी है।
एक रिटायर्ड इंजीनियर के मुताबिक हर साल फरवरी में जितनी भी सड़कों की मरम्मत की स्वीकृति मिलती है, उसमें बजट 31 मार्च तक हर हाल में खर्च करने की मजबूरी दिखाकर काम जैसे-तैसे निपटाया जाता है। मनमाने खर्च पर रोक लग भी नहीं पाती क्योंकि वित्तीय वर्ष समाप्त होते ही बजट को वापस करने का नियम है। बजट का दुरुपयोग रोकने के लिए सड़कों की मरम्मत के इस्टीमेट कम से कम तीन माह पहले स्वीकृत होने चाहिए।
इन योजनाओं में होनी है सड़कों की मरम्मत
योजना का नाम लंबाई कार्य की संख्या स्वीकृत बजट
डा. राम मनोहर लोहिया
समग्र विकास योजना 5.330 किमी. चार 126.24 लाख
रामशरण दास ग्राम सड़क
योजना 8.540 किमी. 10 293.63 लाख
राज्य सड़क निधि 147.520 किमी. 80 1381.50 लाख
13वां वित्त आयोग 9.040 किमी. 06 95.67 लाख
विशेष मरम्मत योजना 67.90 किमी. 33 756..92 लाख
जिला योजना 5.750 किमी 05 190.34 लाख
‘सड़क मरम्मत के कामों की टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। बारिश होने से काम प्रारंभ नहीं हो पाए। 31 मार्च तक सभी सड़कों की मरम्मत का काम पूरा करा देंगे।’ संजीव भारद्वाज, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी