दारुल इफ्ता ने भले ही डिजायनर और फिटिंग वाले बुर्का पहनना महिलाओं के लिए सख्त गुनाह करार दिया हो पर बुर्का खरीदते समय मुस्लिम महिलाओं की प्राथमिकता में उसकी डिजायन ही रहती है। शहर में बुर्का या नकाब सेंटर नाम से सबसे ज्यादा वेरायटी वाली दुकानें सैलानी में हैं। जहां काले बुर्के में कुछ नए की तलाश लिए मुस्लिम महिलाएं मिल जाएंगी।
बृहस्पतिवार दोपहर ऐसी कई दुकानों पर जब दुकानदारों और ग्राहक महिलाओं से बुर्के के बारे में पूछा तो ‘डिजायनर बुर्का’ ही उनकी जुबान पर था। दुकानदार तौकीद बताते हैं कि मार्केट में अस्सी प्रतिशत मांग तो डिजायनर बुर्के की ही है। बोले, कुछ पुराने ख्यालात वाली महिलाएं भी आ जातीं हैं, इसलिए सादा बुर्कों के कुछ पीस भी रख लेते हैं। सैलानी पर ही मिलीं सेमलखेड़ा की फिजां को जब फतवे के बारे में बताया तो मुस्कुराईं और फिर बोलीं- बहुत चुस्त बुर्का तो वह नहीं पहनतीं पर टेलर से उसे अपनी फिटिंग का तो करवाना ही पड़ता है, बरना उसे पहनकर चलना भी मुश्किल हो जाएगा। पूरनपुर से कुतुबखाना बाजार में अपने बेटे के साथ खरीदारी कर रहीं गुलबार फातिमा बोलीं, ज्यादा चुस्त बुर्का तो वैसे भी नहीं पहनना चाहिए। इससे ब्लड सर्कुलेशन रुक जाता है पर डिजायनर बुर्का पहनने से मनाही तो ठीक नहीं है। मेहर खान ने बताया कि बुर्का खरीदते समय फैब्रिक का ही वह विशेष ख्याल रखती हैं। नए फैब्रिक स्ट्रैचेबल हैं और ज्यादातर बुर्के इन फ्रैब्रिक में ही आ रहे हैं।
अब सिर्फ काले नहीं रहे बुर्के
आईआईएफटी की फैशन डिजायनर सैयद सुबोही मुद्दसर ने बताया कि दो साल से बुर्के को फैशन के तरीके से देखा जा रहा है। जरी, सलमा सितारा का वर्क बुर्का पर किया जा रहा है। रेशम और जरी की एंब्राइडरी हो रही है। ऑफिस जाने वाली महिलाओं के लिए कोट कॉलरदार और लांग कोट के जैसा बुर्का फैशन में है। इसे महिलाएं खूब पसंद कर रही हैं। पहले बुर्के में चाइनीज कॉलर ही होता था, जिसमें बटन लगते थे और शर्ट की तरह कफ वाली अस्तीन होती थी। पर अब नेहरु, चाइनीज, कोट, अंगरखा स्टाइल के भी कॉलर वाले बुर्के बन रहे हैं। कोट की तरह बेंट भी अब बुर्का में होता है। प्लीट्स का इस्तेमाल भी किया जाता है। अंरेला कट, चूड़ीदार, बिशप स्लीव्स के बुर्के आ रहे हैं। सर्कुलर कट, ए लाइन, फिश कट, एमपायर कट के बुर्के भी चलन में हैं। अब बुर्का सिर्फ काला नहीं रहा। नौकरी पेशा विशेषकर ऑफिस जाने वाली महिलाओं के लिए सफेद, ग्रे, ब्राउन और क्रीम कलर के कोटनुमा बुर्के मार्केट में हैं। इसके अलावा ऑर्नामेंटल, फ्लोरल, ज्यामितीय प्रिंट के बुर्कों की भी खूब मांग है। उन्होंने बताया कि पहले बुर्का के साथ चेहरा ढकने के लिए टफ होता था पर अब डिजायनर स्टॉल (प्रिंटेड), हिजाब और नोज पीस आते हैं। इन्हें अपने तरीके से बांधा जा सकता है। युवतियां अब कंट्रास्ट कलर के भी हिजाब या स्टॉल पहनती हैं। पहले सिर्फ जॉर्जट के ही बुर्के बनते थे, लेकिन अब कई और स्टफ जैसे हॉजरी, लाइक्रा, कॉर्टन (चेक फ्रैबिक), क्रेप के बुर्के बहुत पसंद किए जा रहे हैं।