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बीडीओ निलंबित, सीडीओ का जवाब तलब 

Thu, 04 Jan 2018 06:24 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,बरेली
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विधायक निधि के दुरुपयोग के मामले में भोजीपुरा के तत्कालीन बीडीओ (वर्तमान में मुरादाबाद में तैनात) अनुज सक्सेना को निलंबित कर दिया गया है। बीडीओ पर यह कार्रवाई सीडीओ सत्येंद्र कुमार के आरोप पत्र के आधार पर हुई है। निलंबन अवधि में वह संयुक्त विकास आयुक्त (जेडीसी) मुरादाबाद से संबद्ध रहेंगे। विधायक निधि के दुरुपयोग में उनकी भूमिका की जांच संयुक्त विकास आयुक्त (जेडीसी) बरेली करेंगे। हाईकोर्ट में शपथ पत्र दाखिल करने में देरी पर सीडीओ का भी जवाब तलब किया गया है। तत्कालीन प्रोजेक्ट डायरेक्टर डीआरडीए साहित्य प्रकाश मिश्र (वर्तमान में ग्राम्य विकास उपायुक्त लखनऊ में तैनात) पर भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है। 
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एक स्कूल को विधायक निधि से दी गई रकम के दुरुपयोग के मामले में हाईकोर्ट में समय से शपथ पत्र दाखिल न करने पर प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास विभाग अनुराग श्रीवास्तव ने भोजीपुरा के तत्कालीन बीडीओ अनुज सक्सेना को निलंबित कर दिया है। विधायक निधि के दुरुपयोग और शपथ पत्र समय से दाखिल न करने पर उनकी भूमिका की जांच जेडीसी बरेली को सौंपी गई है। प्रमुख सचिव की ओर से जारी आदेश में सीडीओ सत्येंद्र कुमार से पूछा गया है कि जब 2015 से विधायक निधि का मामला उच्च न्यायालय में लंबित था तो शपथ पत्र दाखिल करने में देरी क्यों हुई। सीडीओ ने हाईकोर्ट में समय से शपथ पत्र दाखिल न करने के मामले में तत्कालीन प्रोजेक्ट डायरेक्टर साहित्य प्रकाश मिश्र और बीडीओ अनुज सक्सेना के खिलाफ शासन को आरोप पत्र भेजा था। साहित्य प्रकाश मिश्र वर्तमान में ग्राम्य विकास उपायुक्त के पद पर लखनऊ में तैनात हैं। उन पर भी कार्रवाई होना तय माना जा रहा है। इस मामले में वाद लिपिक को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। 
 
यह था मामला
वर्ष 2004-05 में तत्कालीन कैंट विधायक शहजिल इस्लाम ने पीलीभीत बाईपास रोड स्थित स्प्रिंग डेल स्कूल को अपनी निधि से बाउंड्रीवाल निर्माण, लाइब्रेरी निर्माण और फर्नीचर खरीदने के लिए कई किस्तों में 18 लाख रुपये दिए थे। डीआरडीए में विधायक निधि देखने वाले बाबू ने स्कूल को पैसा देने की डील कराई थी। बाद में स्कूल प्रबंधक ने स्कूल की जमीन बेच दी और स्कूल को दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया। इस पर स्कूल प्रबंधक के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। डीआरडीए ने जांच के बाद स्कूल प्रबंधक को 57 लाख रुपये की रिकवरी का नोटिस भेजा तो प्रबंधक हाईकोर्ट चले गए। तब से न्यायालय में यह मामला लंबित है। डीआरडीए अफसरों ने कोर्ट में समय से शपथ पत्र दाखिल नहीं किया। इस पर उच्च न्यायालय ने हाल ही में डीएम और सीडीओ के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर उन्हें तलब कर लिया। न्यायालय में मामले की सुनवाई बृहस्पतिवार को होनी है। डीएम और सीडीओ को कोर्ट में खुद मौजूद रहकर जवाब देना है। 
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‘खुद को बचाने के लिए मुझ पर कराई गई कार्रवाई’
विधायक निधि के दुरुपयोग के मामले में समय से प्रति शपथपत्र दाखिल न करने पर शासन से निलंबित किए गए तत्कालीन बीडीओ अनुज सक्सेना का कहना है कि उन्हें अभी निलंबन का आदेश नहीं मिला है, लेकिन मौखिक सूचना मिल गई है। बताया, उन्हें 2015 में बरेली में तैनाती मिली थी। तब तत्कालीन सीडीओ ने उन्हें कोर्ट में प्रति शपथपत्र दाखिल करने के लिए अधिकृत किया था। वह काउंटर एफिडेविट दाखिल करने हाईकोर्ट गए तो वहां कहा गया कि जिलाधिकारी से अधिकृत कराकर लाओ। 21 जून, 2016 को उन्हें जिलाधिकारी ने दोबारा काउंटर लगाने के लिए अधिकृत किया। तब उनकी मां गंभीर हालत में थीं, फिर भी वह 21 जुलाई को काउंटर दाखिल करने इलाहाबाद गए और केस की फाइल स्टैंडिंग कमेटी को दी। पांच अगस्त को उनकी मां का निधन हो गया और सितंबर में उनका मुरादाबाद ट्रांसफर हो गया। चार्ज छोड़ने से पहले उन्होंने विधायक निधि केस की फाइल तत्कालीन डीआरडीए पीडी साहित्य प्रकाश मिश्र को दे दी। इसके बाद न्यायालय में काउंटर लगाने की जिम्मेदारी तत्कालीन पीडी और विधायक निधि देखने वाले लिपिक की थी। मुकदमे की तीन तारीखों में काउंटर नहीं लगाने पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया तो निर्दोष लोगों पर कार्रवाई कर स्वयं को बचाया जा रहा है।
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