जनपद में चल रही 108 और 102 एंबुलेंस सेवा परीक्षा में बुरी तरह फेल हो गई। संचालन करने वाली कंपनी जीवीके के अधिकारी बुधवार की देर शाम अचानक जांच करने पहुंचे तो सबकी कलई परत दर परत खुलती रही। एंबुलेंस और कर्मचारियों का बुरा हाल देखकर खूब डांट पिलाई। जांच के दौरान एंबुलेंस के अटेंडेंट को ऑक्सीजन मास्क तक लगाना नहीं आया। अधिकारी एंबुलेंस के हाल से इतना परेशान हो गए कि उन्हाेंने अपना सिर पीट लिया। यह जांच गुपचुप तरीके से की गई थी। इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियाें तक को नहीं थी। सपा विधायक हाजी मोहम्मद इरफान की एंबुलेंस में मौत होने के बाद इस तरह की जांच पहली बार हुई है। हालांकि कंपनी के अधिकारियों ने स्वास्थ्य अधिकारियों को नियमित जांच के बारे में बताया है। प्रदेश में समाजवादी सरकार की बड़ी सेवा में मानी जाने वाली 108 और 102 एंबुलेंस का संचालन जीवीके कंपनी कर रही है। जिले में 108 एंबुलेंस 22 हैं और 102 एंबुलेंस की संख्या 32 है।
ये कैसी एम्बुलेंस है बाबा!
अधिकारियों ने समय जांचने को फोन कर 108 और 102 एंबुलेंस को फोन कर एडी हेल्थ कार्यालय बुलाया। सूचना जेडी हेल्थ डॉ. सुबोध शर्मा को मिली तो वे भी मौके पर पहुंचे। टीम ने 108 एंबुलेंस के अटेंडेंट से ऑक्सीजन का मास्क लगाने के बारे में पूछा तो वह नहीं बता पाया। एंबुलेंस की हालत बहुत खराब थी। जेडी हेल्थ ने अधिकारियों से एंबुलेंस की बुरी स्थिति के बारे में बताया। कहा कि उन्होंने खुद एक दिन एंबुलेंस चेक किया था जिसकी हालत खराब थी। न ट्रैकिंग सिस्टम चालू था और न ही एसी। एंबुलेंस का रजिस्टर गलत भरा गया। उसमें तमाम खामी थी। अधिकारी को बोलना पड़ गया कि नकल ही किये थे तो अकल से करते। खुद बोले कि बरेली में एंबुलेंस ‘आर्डर’ में नहीं है। रजिस्टर में रातों रात तमाम जानकारी भर ली गईं। कर्मचारियों को डांटते रहे वे सब सुनते रहे। गुपचुप जांच की सूचना पर पहुंचे फोटोग्राफर को देखकर अधिकारी सकपका गए। उन्होंने तुरंत अपनी जांच बंद कर एंबुलेंस को एडी कार्यालय से रवाना कर दिया।
- ये मिली खामियां
एंबुलेंस में एसी नहीं चलते
ट्रैकिंग सिस्टम बेकार
अग्निशमन यंत्र की हालत खराब
शिकायत के स्टीकर गलत चिपके
दवाईयों की उपलब्धता नहीं थी
ऑक्सीजन की स्थिति भी खराब
अटेंडेंट को ऑक्सीजन मास्क लगाना नहीं आया