वर्षों से थिएटर फलता-फूलता आया है, उसे कोई झुका नहीं सकता। थिएटर ने मुझे हर मंच पर खड़ा रहने का साहस दिया। इसकी ऑडियंस ही अलग है। इसके चित्रकार, कहानीकार, कलाकार, उपन्याकार, संगीतकार सब नाट्य शास्त्र के हिस्से हैं। यह बात शनिवार को विंडरमेयर में आए कलाकार राजपाल यादव से अमर उजाला से बातचीत के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि नाटक के जरिए 1992 में करियर की शुरुआत की थी। अभी तक मैंने एकल नाटक नहीं किया था। साल के मध्य तक लेखक निलय उपाध्याय का लिखा नाटक मनोरंजन कुमार उर्फ 36 चैने आप को देखने को मिलेगा। बताया कि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय इस बार अपना 25वां स्थापना वर्ष मना रहा है। उसमें मुझे ब्रांड एंबेस्डर बनाया गया है। मैंने अपने जीवन में करीब 200 सौ फिल्में की है।
रुहेलखंड जन्मभूमि और फिल्म कर्मभूमि के बीच थिएटर मेरी दाई मां रहेगी। थिएटर ने मुझे हर मंच पर खड़ा रहने का साहस दिया। दुनिया का सामना करना सिखाया। भाषा, व्यवहार और संस्कार सिखाया। इसलिए थिएटर हमेशा प्रथम रहेगा। राजपाल ने स्टैंडअप कॉमेडी पर कहा कि रसों का राजा हास्य रस है। इसमें अनेक विधाएं हैं, एक जन्म भी इसे समझने के लिए कम है। स्टैंडअप कॉमेडी भी उसी का एक हिस्सा है।
युवाओं को दे गए सीख
युवाओं के लिए बस एक ही बात कहेंगे कि बीज बन जाओं। बीज को बोना पड़ता है, सड़ना पड़ता है, उगना पड़ता है। लेकिन बीज ऊपर की ओर बढ़ता है। बीज को कोई मतलब नहीं होता कि उसे कैसे बोया गया है। उसे सिर्फ बढ़ने रहना है। इसलिए कहता हूं बीज बन जाओ। इसी में देश का भला है।