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ऑनलाइन लेनदेन की डालें आदत.. मंदी कहीं नहीं है

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बरेली। अमर उजाला की ओर से आयोजित समृद्धि संवाद कार्यक्रम के दूसरे दिन रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल सेक्टर के उद्यमियों ने विशेषज्ञों के साथ बाजार के हालात पर अपने विचार रखे। बाजार में हो रहे बदलाव, ट्रेंड, उसकी चुनौतियां और समाधान को लेकर मंथन किया गया। कारोबारियों, अर्थशास्त्री और बैंकिंग विशेषज्ञ ने कहा कि यह समय अर्थव्यवस्था और योजनाओं में बदलाव का है। नवरात्र का इंतजार है और बाजार में निश्चित ही कारोबार देखने को मिलेगा।
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चर्चा के दौरान कारोबारियों ने कहा कि इस समय गिरावट कोई नई बात नहीं है। मोहर्रम और चातुर्मास में यही स्थिति हर साल रहती है। इस दौरान सिर्फ जरूरतमंद ही खरीदारी करते हैं और उनकी मौजूदगी लगातार बाजार में बनी हुई भी है। बाकी लोग परंपरा के हिसाब से त्योहार पर खरीदारी करते हैं, ऑटोमोबाइल और रियल एस्टेट सेक्टर भी इसमें शामिल हैं। छोटी कारों की बिक्री बेशक कम हुई लेकिन उसमें सिर्फ कुछ कंपनियों की कारें ही शामिल हैं, जिनकी मैन्युफैक्चरिंग बहुत ज्यादा थी। बड़ी कारें आज भी बिक रही हैं। ऐसे में कारों की बिक्री की संख्या भले ही कम हुई हो लेकिन राजस्व में कमी नहीं हुई है। इसके अलावा बीएस-6 और इलेक्ट्रिक कारों की चर्चा की वजह से भी लोग अभी कुछ कम रुचि ले रहे हैं। इसमें लोगों को समझने की जरूरत है कि यह बदलाव अभी दूर की बात है। इलेक्ट्रिक कारों से पहले तो सीएनजी का दौर आएगा जो बरेली जैसे शहर में अब भी बहुत ज्यादा चलन में नहीं हैं।

विशेषज्ञों की बात
आने वाला समय अर्थव्यवस्था के लिए बहुत अच्छा है। निर्माण क्षेत्र मजबूत होगा, जिस पर सरकार काम कर रही है। चाइना में भी यही सेक्टर सबसे मजबूत है। इसके मजबूत होने से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। कारपोरेट टैक्स में छूट देने के पीछे एक बड़ी वजह यही है। साथ ही कारोबारी क्षेत्र में बड़े घरानों के स्थापित होने से तरक्की बढ़ेगी और उनके जरिये भी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। कारोबारियों को अब परंपरागत तरीका छोड़कर काम करने की जरूरत है। बैंकों के विलय से एनपीए का बोझ कम होगा। स्टार्टअप और नवाचार पर अभी और ध्यान देने की जरूरत है।
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- डॉ. पीके सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर, अर्थशास्त्र, बरेली कॉलेज

सरकार ने लघु उद्योगों को राहत देने के लिए तमाम योजनाएं शुरू की हैं। एनपीए का समय काफी बढ़ा दिया गया है, अब 31 मार्च तक कोई खाता एनपीए नहीं होगा। इससे इन उद्योगों को संभलने के लिए लगभग एक साल का समय मिल गया है। खास बात यह है कि किसी भी क्षेत्र में ब्लैक मार्केटिंग प्रभावित है। पहले कुछ ही लोग लाभ कमाते थे, अब यह बंट रहा है। अब हम तर्कसंगत अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं। जो लोग हिसाब-किताब से बचते थे, उनके लिए दिक्कत हो रही है। बाजार से अदृश्य चीजों की ट्रेडिंग बंद हुई है, लोग निवेश से बच रहे हैं लेकिन पैसे की कोई कमी नहीं है।
- दीपक आचार्य, एजीएम, पंजाब नेशनल बैंक

कारोबारियों की बात
ग्राहक बीएस-6 के चक्कर में घबराए हैं। मंदी का शोर मचा है कि पता नहीं अब क्या हो जाएगा। कुछ कंपनियों की छोटी कारें छोड़ दें तो कहीं भी बिक्री कम नहीं हुई है। अब त्योहारी सीजन में और बदलाव देखने मिलेगा।
- पंकज अग्रवाल, बांके बिहारी मोटर्स

लोग बीएस-6 और इलेक्ट्रिक कार की बात कर रहे हैं लेकिन अभी सीएनजी भी खूब चलन में नहीं है। हमें इस पर चर्चा करनी चाहिए। कुछ सरकार की नीतियों की वजह से भी भ्रम की स्थिति है, यह स्पष्ट होनी चाहिए।
- अल्पित अग्रवाल, एकेसी ग्रुप
लोगों के पास पैसा है लेकिन चलन में नहीं है। रियल एस्टेट में गिरावट की वजह से पैसा बाजार में नहीं आ रहा है। लोग खुद को सामने लाने से बचने के लिए ऑनलाइन कारोबार से बच रहे हैं। अब इसमें सुधार आएगा।
- मुदित अग्रवाल, श्री साईं होंडा

मैट्रो सिटीज में थोड़ा स्लो डाउन है लेकिन यहां ग्राहकों का भरोसा न होने की वजह से दिक्कत है। नोटबंदी के बाद भी रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश जारी है क्योंकि यहां पैसा सुरक्षित है। बेशक कम हो लेकिन फायदा जरूर होगा।
- रिषभ अग्रवाल, मेगा ड्रीम्स

ग्राहक भ्रमित है इसलिए बाजार में खरीदारी की रफ्तार कम हुई है। अब लोग जरूरत के हिसाब से ही खर्च करते हैं लेकिन बाजार में कोई नया मॉडल आने पर आज भी खरीदारों की भीड़ होती है। जल्दी ही यहां भी बूम दिखेगा।
- शैलेंद्र, कारेल मोटर्स

कैश फ्लो कम होने की वजह से लोग सोचते हैं कि पैसा फंस न जाए। नोटबंदी का भी असर है। पहले लोग रियल एस्टेट में निवेश करते थे लेकिन अब यह सपोर्ट खत्म हो गया है। इस वजह से भी इस सेक्टर में गिरावट है।
- विवेक शर्मा, मैक्सिम इंफ्राजोन

नोटबंदी की वजह से कैश फ्लो घटा है। लागत बढ़ने से कीमत भी बढ़ रही है। पहले निवेशक सपोर्ट करते थे लेकिन अब वह बंद है। रिश्वतखोरी की वजह से सरकार खुद फर्जीवाड़ा करने को मजबूर कर रही है।
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- धर्मेंद्र गुप्ता, डीजी इंफ्रा
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