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Bareilly News: रुविवि में एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्ति में धांधली के आरोप, प्रशासन ने दी क्लीन चिट

Mon, 01 Apr 2024 08:17 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
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बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय की एक एसोसिएट प्रोफेसर के दस्तावेजों को फर्जी बताते हुए उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाए गए हैं। इसको लेकर आईजीआरएस पर शिकायत की गई थी। उनके चयन में धांधली का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की गई। मामले में कुलपति स्तर से गठित समिति ने शिक्षिका को क्लीनचिट दे दी है।
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शाहजहांपुर निवासी शिकायतकर्ता डॉ. संतोष सिंह ने शिकायत में कहा है कि विवि के प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग के विषय में एसोसिएट प्रोफेसर के पद के लिए साक्षात्कार पिछले साल अप्रैल को हुआ था। आरोप है कि कुल दस में तीन से अधिक अभ्यार्थियों को योग्यता न होने पर भी साक्षात्कार के लिए बुलाया गया और यूजीसी के नियमों के विरुद्ध चयन हुआ। आरटीआई में दो बार अपील के बाद भी नियुक्ति की जानकारी नहीं दी गई। इधर, आईजीआरएस पर शिकायत केे बाद कुलपति ने दो सदस्यों की जांच समिति गठित की। इसमें विवि के क्रीड़ा सचिव प्रो. आलोक श्रीवास्तव और एसडी कॉलेज मुजफ्फरनगर के इतिहास विभाग के प्रो. अजय पाल सिंह शामिल थे। जांच समिति ने रिपोर्ट में शिक्षिका को क्लीन चिट दे दी है।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि चयनित एसोसिएट प्रोफेसर को आठ वर्षों का पाठन अनुभव नहीं है। उन्होंने पुरातत्व विषय से नेट पास किया है, इतिहास से नहीं। उनका अनुभव प्रमाणपत्र ही संदिग्ध है। उन्होंने अतिथि प्रवक्ता के रूप में रुविवि में सेवाएं दी हैं, जिसका कार्यकाल शैक्षणिक सत्र के प्रारंभ से 31 मई तक होता है। कुलपति स्तर से गठित समिति ने जवाब में कहा है कि चयनित एसोसिएट प्रोफेसर का आठ वर्ष से अधिक का पाठन अनुभव विश्वविद्यालय प्राधिकारी से स्वीकृत है। उन्हें चयन समिति ने चुना था। पुरातत्व विषय पुरातन इतिहास का अभिन्न अंग है। उनके अनुभव प्रमाणपत्र पर विभागाध्यक्ष ने हस्ताक्षर किए हैं। ऐसे में वह इस पद के योग्य हैं।
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वर्जन..
इतिहास विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्ति को लेकर शिकायत प्राप्त हुई थी। मामले में जांच पूरी हो चुकी है। गठित समिति की रिपोर्ट के बाद प्रकरण निस्तारित हो चुका है। शासन स्तर तक रिपोर्ट भेजी गई है। इसमें कोई अनियमितता नहीं पाई गई।
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-डॉ. अमित सिंह, मीडिया प्रभारी, रुहेलखंड विश्वविद्यालय
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