दूसरी ओर, चौकीदार वाहिद अली के बेटे साजिद का कहना है यहां वर्ष 1976 से समिति संचालित है। 40 वर्ष पूर्व पिता की नौकरी लगी थी। तभी से यहां रह रहे हैं, पर तीन-चार दिन से स्थानीय निवासी राकेश सिंह, उनके भाई नरेंद्र व अन्य परिजन जबरन दावा कर रहे हैं। इसकी सूचना समिति के सचिव को दे दी है।
दूसरे समुदाय की जनसंख्या बढ़ने से बंद हुई पूजा
मंदिर का दावा कर रहे पक्ष के मुताबिक सरकारी दस्तावेजों में अंकित मंदिर पर वाहिद अली ने कब्जा कर लिया। मंदिर में दूधिया शिवलिंग और शिव परिवार स्थापित था। वर्ष 1800 में रेलवे लाइन भी उनकी जमीन पर निकली थी। धीरे-धीरे यहां दूसरे समुदाय की आबादी बढ़ती गई। इस वजह से हिंदुओं की आवाजाही कम हो गई और मंदिर में पूजा-पाठ भी बंद हो गया।