खुर्द-बुर्द की गईं वक्फ की संपत्तियां
मौलाना ने आगे कहा कि हमारे बुजुर्गों ने अपनी संपत्तियां इसलिए वक्फ की थी कि इसकी आमदनी से मुसलमानों के गरीब, कमजोर बच्चों की तालीम का अच्छा इंतजाम किया जा सके। यतीम और बेवाओं की मदद हो सकें। मगर ये सब न होकर वक्फ बोर्डों के जिम्मेदारों ने भूमाफिया से सांठगांठ करके संपत्तियों के बेचने और पैसा कमाना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से संपत्तियां खुर्द-बुर्द हो गईं।
मौलाना ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकारों ने बोर्ड के जिम्मेदारों पर अंकुश लगाने के लिए कोई काम नहीं किया। बोर्ड के जिम्मेदारों को खुली छूट दे दी गई। अगर सरकारें पहले ही वक्फ संपत्तियों के रख रखाव के लिए बेहतर कदम उठाती तो कुछ मुसलमानों का भला हो सकता था।
गैर मुस्लिम को न बनाया जाए सदस्य
बैठक में एक प्रस्ताव पास करके सरकार से कहा गया कि इस संशोधन बिल में मस्जिद के इमामों और खिदमत करने वालों की तनख्वाह मुकर्रर करने का प्रावधान रखा जाए। साथ ही वक्फ बोर्ड की कार्यकारणी में गैर मुस्लिम को सदस्य नामित न किया जाए। इस संबंध में मुस्लिम जमात ने प्रधानमंत्री और अल्पसंख्यक मंत्री को पत्र भी लिखा है।