आल इंडिया मुस्लिम मजलिस दलित मुस्लिमों के साथ हो रहे अन्याय पर आवाज बुलंद करेगी। मजलिस ने इसके साथ कुछ हिंदूवादी संगठनों को राष्ट्रविरोधी घोषित कर उन पर पाबंदी लगाने की भी मांग की है।
बरेली में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद उपजा प्रेस क्लब में पत्रकारों से बात करते हुए प्रदेश अध्यक्ष नदीम सिद्दीकी ने कहा कि संविधान में सभी वर्गों के दलितों को आरक्षण का प्रावधान किया गया था। वर्ष 1950 में प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने प्रेसीडेंसियल आर्डर के सहारे दलित से पहले हिंदू शब्द लिखवा दिया। इसके बाद मुस्लिम दलितों के लिए आरक्षण का रास्ता बंद हो गया। उन्होंने कहा कि मजलिस धारा 341 में संशोधन करके दलित से पहले मुस्लिम शब्द लिखवाने या धर्म की पाबंदी हटाने की मांग करेगा। कार्यवाहक राष्ट्रीय अध्यक्ष वसी अहमद ने कहा कि केंद्र की राजनीति संघ परिवार संचालित कर रहा है। इससे मुस्लिमों में भय का वातावरण है। इसलिए हिंदू महासभा और विहिप आदि संगठनों पर प्रतिबंध लगाया जाए। राष्ट्रीय सचिव जुनैद खां ने आतंकवाद के झूठे आरोपों से बरी हुए नौजवानों को आर्थिक मदद देकर मुख्यधारा में लाने की मांग की। प्रेसवार्ता में तौफीक जाफरी, हिफजुर्रहमान, निसार अंसारी, विलायत हुसैन, खलीक और अतीक करम इदरीसी आदि शामिल रहे।