रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने आला हजरत और राधेश्याम शोध पीठ की स्थापना के लिए संचालन समिति बना दी है। शासन की चिट्ठी दौड़ने के बाद विश्वविद्यालय ने प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मुख्यमंत्री ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय में आला हजरत और राधेश्याम शोध पीठ की स्थापना की घोषणा की थी। इसके बाद विश्वविद्यालय ने शासन को नियुक्ति के संबंध में ग्रांट की भी मांग की। विश्वविद्यालय के पत्र पर शासन ने कार्यवाही करने के बजाय यह लिखकर भेज दिया कि रुहेलखंड विश्वविद्यालय बचत का विश्वविद्यालय है। इसे शासन से कोई भी ग्रांट नहीं मिलती है, इसलिए विश्वविद्यालय सबकुछ अपने स्तर से ही करना पड़ेगा। शासन की इस चिट्ठी के बाद रुहेलखंड विश्वविद्यालय बहुत निराश हुआ है। अब वह शोध पीठ की स्थापना की रस्मअदाएगी करने में लगा हुआ है। दरअसल, किसी भी शोध पीठ में एक डायरेक्टर के साथ ही एक लाइब्रेरी और अन्य स्टाफ होता है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के पास बिल्डिंग तो है, लेकिन वह डायरेक्टर आदि की भर्ती कर वेतन नहीं दे सकता है। सूत्रों की मानें तो अब विश्वविद्यालय ऐसे व्यक्ति को शोध पीठ संभालने की जिम्मेदारी देगा, जो अवैतनिक हो। विश्वविद्यालय किसी को भी वेतन देकर रखने की स्थिति में नहीं है। आला हजरत और राधेश्याम के संबंध में जो भी किताबें हैं, वो अलग बिल्डिंग में रखकर शोध पीठ बना दी जाएगी। इसके साथ ही विश्वविद्यालय वहां पर कुछ अपने ही कर्मचारियों की ड्यूटी लगा देगा। ऐसे में कहने को शोध पीठ तो बन जाएगा, लेकिन व्यवस्थित रूप से नहीं।
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आला हजरत और राधेश्याम शोध पीठ की स्थापना के संबंध में शासन का पत्र आने के बाद संचालन समिति बना दी गई है। यह संचालन समिति ही शोध पीठ बनाएगी।
- साहब लाल मौर्य, रजिस्ट्रार, रुहेलखंड विश्वविद्यालय