पीलीभीत बाईपास रोड के दोनों ओर ग्रीन बेल्ट गायब होती जा रही है। दोनों तरफ की 35-35 मीटर जमीन पर प्रतिदिन अवैध कब्जे हो रहे हैं। देवी देवताओं की मूर्तियों या मजार की आड़ लेने वाले ही नहीं ढाबे, खोखे वाले भी कतार से आगे बढ़ रहे हैं। कुछ ने पक्का निर्माण कर लिया। दर्जनों स्थानों पर पक्का और अस्थाई निर्माण अब भी चल रहा है।
सेटेलाइट रोडवेज के सामने फलों के ठेले और दूसरी ओर तांगे, रिक्शे टैंपो खड़े हैं। चंद कदम दूर सीएनजी पंप के सामने प्राइवेट बस अड्डा रोड पर ही बना है। ठेले और खोखे वालों ने आधी से ज्यादा सड़क घेर रखी है। फिर गुप्ता कार बाजार, ऊं साईं कार बाजार की कारें बिक्री के लिए हाइवे की जमीन पर ही खड़ी हैं। सौ कदम आगे चलने पर सड़क के दाहिनी ओर बंगाली परिवार रहता है। इस परिवार ने सड़क के किनारे देवी देवताओं की मूर्तियां लगाकर उसे मंदिर का रूप दे रखा है। पीछे की जमीन में घर बना रखा है। बगल में ही मजार भी बनी है। यूं तो मजार के गेट पर अक्सर ताला लटका रहता है लेकिन पड़ोस के दुकानदार ने बताया कि यासीन नाम काव्यक्ति मजार पर आता जाता रहता है। फाइक इन्क्लेब, गार्डन सिटी से बीसलपुर चौराहे तक ठेले, खोखे, मोटर मैकेनिकट, बिल्डिंग मैटेरियल, सरिया सीमेंट की दुकानों और कारों ने सड़क घेरी हुई है।
मंदिर - मजार बनेंगे झगड़े की जड़
संजय नगर मोड़ पर बजरंग ढाबा, चंद्रा बिल्डिंग मेटेरियल, माइसेंम सीमेंट, लाइफ लाइन अस्पताल के वाहन सड़क तक खड़े होते हैं। सुरेश शर्मा नगर चौराहे पर देवी देवताओं की मूर्तियां लगाकर नीलकंठ शिव मंदिर बन गया है। पीछे खोखे और ठेले लगे हैं। पुलिस बूथ की आड़ में खोखे खड़े हैं। दौलत नर्सरी भी ग्रीन बेल्ट की जमीन पर है। ओम शिव नर्सरी मालिक ने भी काफी जमीन घेर रखी है। रुहेलखंड मेडिकल कालेज रोड के कोने पर ग्रीन बेल्ट की जमीन पर पहले मजार बनी। अब ये मस्जिद का रूप ले चुकी है। नमाज भी होने लगी है। बगल में ही सड़क के किनारे पेड़ काटकर आश्रम बन गया। इसमें भगवान शिव की मूर्ति भी लग चुकी है। मेडिसिटी अस्पताल के सामने नया ढाबा खुल चुका है। गणेश स्टील, रामा इंटरप्राइजेज, एचबी बिल्डिंग मैटेरियल, आल मकराना, यश आटो, बाबा भट्टा के बोर्ड लग चुके हैं। इन पर स्थाई निर्माण चल रहा है।
70 मीटर की ग्रीन बेल्ट गायब
नेशनल हाइवे अथारिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) की पीलीभीत बाईपास रोड के दोनों ओर 35-35 मीटर जमीन ग्रीन बेल्ट की है। फन सिटी के आगे तक ये जमीन लगभग गायब हो चुकी है। एनएचएआई अपनी जमीन बचाने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहा।
‘प्रशासन को पीलीभीत बाईपास रोड का अतिक्रमण हटवाने के लिए तीन बार पत्र लिखा। 10 कब्जेदारों को नोटिस भी दिए गए। मेरे पास फोर्स नहीं है। जब तक प्रशासन नहीं चाहेगा, हम अतिक्रमण कैसे हटा सकते हैं।’ आरएस पुरी, प्रोजेक्ट मैनेजर, नेशनल हाइवे अथारिटी ऑफ इंडिया