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आला हजरत उर्स के मंचों पर छाया है तीन तलाक का मुद्दा

Sat, 26 Nov 2016 01:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
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Ala Hazrat is capped at three forums Urs divorce issue - फोटो : बरेली, अमर उजाला
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आला हजरत के उर्स में इस बार हर मंच पर तीन तलाक का मुद्दा छाया हुआ है। ताजुश्शरीया अजहरी मियां का मंच हो, दरगाह प्रमुख सुब्हानी मियां का मंच हो या मन्नानी मियां का मंच, सभी जगह से एक ही आवाज उठी है कि शरीयत में किसी भी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।  
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मथुरापुर स्थित इस्लामिक स्टडी सेंटर में उर्स रजवी कादरी पर ‘अंतरराष्ट्रीय इमाम अहमद रजा कांफ्रेंस’ का आयोजन किया गया। इसमें तीन तलाक के मुद्दे पर पहली बार ताजुश्शरीया मुफ्ती अख्तर रजा खां (अजहरी मियां) बोले। उन्होंने कहा कि मरकजी हुकूमत  शरीयत के मामले में दखल न दे। तीन तलाक तीन ही मानी जाएगी। एक तलाक का फैसला शरीयत में सीधा दखल होगा जिसे बरेली मरकज हरगिज बर्दाश्त नहीं करेगा। लोक सभा में हुकूमत की ओर से बिल ला कर तीन तलाक को एक तलाक मानना मुस्लिम पर्सनल लॉ में दखल और संविधान में अल्पसंख्यकों को दिए गए अधिकारों का हनन होगा। 
उन्होंने कहा इस इस्लामी कानून को बदलने की कोशिश की गई तो  पूरे मुल्क में विरोध किया जाएगा। शरई कांउसिल ऑफ इंडिया में इस मसले को रख कर इसकी मुखालफत की जाएगी। राज्य सभा सांसद मौलाना गुलाम रसूल बलयाबी ने कहा कि समान नागरिक संहिता कानून का मतलब मुस्लिम लॉ को हिंदुस्तान में पूरी तरह खत्म करना है। इसके लिए मुसलमान चुप नहीं बैठेगा।    
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इसी तरह इस्लामिया इंटर कालेज में भी उर्स रजवी पर ‘तहफ्फुजे मुस्लिम पर्सनल लॉ और तहफ्फुजे हुकूके मुस्लिम कांफ्रेंस’ का आयोजन किया गया। दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां (सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती और सज्जादा नशीन मौलाना अहसन रजा खां कादरी की अध्यक्षता में देश विदेश के तमाम आलिमों, मुफ्तियों और समाज के बुद्धिजीवियों ने मुस्लिम पर्सनल लॉ की सुरक्षा और अल्पसंख्यकों के अधिकारों से संबंधित विषय पर चिंतन किया। साथ ही कहा कि तीन तलाक के नाम पर आज शरीयते इस्लामिया में मुखालफत की कोशिश की जा रही है जो हमारे संविधान के विरुद्ध है। इसे रोकने के लिए मुसलमानों को यह बताना होगा कि तलाक का सही तरीका क्या है। जिसे वह समझ सकें। 
उधर बाकरगंज में रजा मुस्लिम मिशन की ओर से ‘शरीयत बचाओ कांफ्रेंस’ का आयोजन किया गया। इसमें सरपरस्ती करते हुए मिशन के अध्यक्ष एवं नबीरे आला हजरत मौलाना मन्नान रजा खां (मन्नानी मियां) सहित तमाम उलमा ने जोरदार तरीके से समान नागरिक संहिता का विरोध किया। उन्होंने कहा कि शरीयत में दखल का किसी को हक नहीं है। इसे मुस्लिम समाज किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेगा। 
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