दरगाह आला हजरत की सज्जादगी संभालने के बाद मौलाना अहसन रजा खां कादरी (अहसन मियां) से विरासत को संभालने से लेकर पाकिस्तान से रिश्तों तक के मुद्दों पर बात हुई। हर मुद्दे पर उन्होंने पूरे इत्मीनान से बात रखी, कहा कि जाम-ए-मोहब्बत का जो पैगाम उनके बुजुर्गों ने लोगों को पिलाया, वही जाम-ए-मोहब्बत हम भी लोगों को पिलाएंगे। पेश है उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश:
पुरखों की विरासत को किस तरह संभालेंगे?
वालिद की सरपरस्ती में पुरखों की विरासत को संभालता रहा हूं, उसे आगे बढ़ाऊंगा। जो मेरे बुजुर्गों का मिशन है उसको आम करेंगे और खास तौर से जहां-जहां मुफ्ती आजम हिंद गए वहां तक मैं भी जाऊंगा। उन्होंने लोगों को जो जाम-ए-मोहब्बत पिलाया वही मैं भी लोगों को पिलाऊंगा। जिन खानकाहों को मुफ्ती आजम हिंद ने जोड़ा था उन्हें फिर से जोड़ेंगे। साथ ही जमात अहले सुन्नत में इत्तेहाद पैदा करेंगे। सज्जादगी देकर वालिद साहब का कद और जिम्मेदारी दोनों और बढ़ गई हैं। अभी तक वह सज्जादा थे अब सरपरस्त सज्जादा हो गए हैं।
आप अपने सामने क्या चुनौतियां मान रहे हैं?
मरकजे अहले सुन्नत जामिया रजविया मंजरे इस्लाम का विस्तार करना है। इसे चुनौती के तौर पर ले रहे हैं।
सज्जादा बनने के बाद अब जो कारवां आपके साथ है उसे किस तरह आगे बढ़ाएंगे?
जमात और खानदान के लोगों को साथ लेकर काम करेंगे, कारवां खुद बढ़ता जाएगा।
आप युवा हैं। युवाओं को किस तरह से अपने साथ जोड़ने का इरादा है?
तहरीक-ए-तहफ्फुज-ए-सुन्नियत (टीटीएस) युवाओं का संगठन है जो पहले से ही मेरे नेतृत्व में काम कर रहा है। इसके माध्यम से युवाओं की तालीम पर जोर देना और आला हजरत के मिशन को आगे बढ़ाना है। साथ ही तहरीक चला कर इस्लाम और बुजुर्गों की तारीख (इतिहास) को लोगों तक पहुंचाएंगे।
पाकिस्तान से रिश्ते बेहतर हों इसके लिए आपके नजरिए से क्या होना चाहिए?
मजहबी एतबार से रिश्ते हैं और ये बेहतर हों, इसके लिए कोशिश जारी रहेगी। सियासी मामलात के एतबार से हम अपने मुल्क भारत के साथ हैं।