बरेली। सुख, समृद्धि, संपत्ति, धन और सौभाग्य के आशीर्वाद के लिए प्रसिद्ध अक्षय तृतीया इस वर्ष 19 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस बार अक्षय तृतीया कई दुर्लभ संयोगों को संजोए हुए हैं जो यश-वैभव, धन-संपदा कारक रहेगी।
पंडित मुकेश मिश्रा के अनुसार, इस बार अक्षय तृतीया पर्व पर शुक्र व चंद्रमा वृषभ राशि में गतिशील होंगे। इससे वैभव लक्ष्मी योग का निर्माण होगा। इसके साथ ही 27 योगों में सबसे प्रमुख आयुष्मान योग भी इस दिन व्याप्त रहेगा। यह दोनों योग यश वैभव धन संपदा के कारक कहे जाते हैं। इन योगों में खरीदारी करना भी अत्यंत शुभ माना गया है।
सूर्य अपनी उच्च राशि में मेष में रहेंगे और चंद्रमा भी अपनी उच्च राशि वृषभ में गोचर करने करेंगे। सूर्य- चंद्रमा की इस दिन उच्च स्थिति जातकों के मनोरथ की पूर्ति करेंगी। इन मंगलकारी योगों के चलते इस दिन भूमि, भवन, वाहन, आभूषण इत्यादि खरीदना अत्यंत शुभ रहेगा। अक्षय तृतीया अबूझ मुहूर्त में से एक है इस दिन विवाह आदि कोई भी कार्य बिना विचारे किया जा सकता है।
अक्षय तृतीया का पौराणिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत अक्षय तृतीया से ही हुई थी। भगवान विष्णु ने नर नारायण का अवतार भी इसी दिन लिया था। भगवान परशुराम का जन्म भी अक्षय तृतीया पर हुआ था। अक्षय तृतीया से ही बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलते हैं। मान्यता है कि इसी दिन विष्णु के चरणों से मां गंगा धरती पर अवतरित हुई थी। अक्षय का मतलब ही कभी क्षय नहीं होने वाला है, इसलिए इस दिन नए कार्य की शुरुआत करना शुभ माना जाता है।