यह है पौराणिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत अक्षय तृतीया से ही हुई थी। भगवान विष्णु ने नर नारायण का अवतार भी इसी दिन लिया था। भगवान परशुराम का जन्म भी अक्षय तृतीया पर हुआ था।
यह भी पढ़ें- Video: नशेड़ी ने खंडहर में फेंकी बच्ची, दिशा पाटनी की मेजर बहन ने बचाई जान; दिनभर की देखभाल फिर मां से मिलवाया
इस शुभ तिथि से ही महाभारत का काव्य लिखना शुरू किया गया था, अक्षय तृतीया से ही बद्रीनाथ के कपाट खुलते हैं। मान्यता है कि इसी दिन विष्णु जी के चरणों से मा गंगा धरती पर अवतरित हुईं थीं। अक्षय का मतलब ही कभी क्षय नहीं होने वाला है, इसलिए इस दिन नए कार्य की शुरुआत करना शुभ माना जाता है।