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Bareilly: नगर निगम की बोर्ड बैठक में विरोध के बाद जुर्माना राशि बढ़ाने के प्रस्ताव पर रोक, गठित की गई समिति

Wed, 01 Oct 2025 11:19 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

बरेली में मंगलवार को नगर निगम की बोर्ड बैठक हुई। चार घंटे चली बैठक में शहर के विकास से जुड़ा कोई भी बड़ा प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया। जो प्रस्ताव रखे भी गए, उनमें से ज्यादातर पर सहमति नहीं बन पाई।
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मेयर उमेश गौतम (दायें), नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य (बायें) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली में नगर निगम की बोर्ड बैठक मंगलवार को हंगामे की भेंट चढ़ गई। चार घंटे की बैठक में शहर के विकास से जुड़ा कोई भी बड़ा प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया। जो प्रस्ताव रखे भी गए, उनमें से ज्यादातर पर सहमति नहीं बन पाई। नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वच्छता नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने की राशि को 10 से 50 गुना तक बढ़ाने के प्रस्ताव का पार्षदों ने कड़ा विरोध किया। 

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गौरव सक्सेना ने इस प्रस्ताव को अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि इससे जनता का उत्पीड़न और शोषण होगा। कहा कि सड़क पर निर्माण सामग्री रखने पर जुर्माना दो हजार से बढ़ाकर 25 हजार, रोड कटिंग का एक हजार से बढ़ाकर 50 हजार करने से मुश्किलें आएंगी। आम लोगों की पूरी कमाई जुर्माना अदा करने में ही चली जाएगी। कड़े विरोध के बाद महापौर ने अपर नगर आयुक्त के साथ ही सपा पार्षद गौरव सक्सेना और राजेश अग्रवाल व भाजपा पार्षद छंगामल मौर्य, सतीश कातिब और सर्वेश रस्तोगी को शामिल करते हुए समिति गठित की। समिति के सुझावों के आधार पर जुर्माने की राशि तय की जाएगी।
 
राजेश अग्रवाल ने डीडीपुरम और स्टेशन रोड के आवासीय भवनों पर कर विभाग की ओर से मनमाने ढंग से टैक्स लगाने का आरोप लगाया। महापौर ने मामले की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया।  गौरव सक्सेना ने भी कर विभाग के कुछ कर्मचारियों पर रिश्वत लेने और पार्षदों की सिफारिश पर काम अटकाने का आरोप लगाया। कहा कि खाली दुकानों पर शटर लगे होने के कारण आवासीय भवनों पर गलत तरीके से गैर-आवासीय कर लगाया जा रहा है।

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फैसले धरातल पर लागू नहीं होते, ऐसी बोर्ड बैठक का क्या फायदा
बरेली। बोर्ड की बैठक कागजी हो गई है। यहां उठाए जाने वाले मुद्दों पर आश्वासन तो मिल जाता है मगर, फैसले धरातल पर लागू नहीं होते हैं। ऐसे में इस बैठक का क्या औचित्य? सपा पार्षद दल के नेता गौरव सक्सेना, राजेश अग्रवाल और सतीश कातिब ने ये सवाल पूछते हुए कहा कि पिछली बैठक में छुट्टा गोवंश व कुत्तों को पकड़ने के लिए टीमें गठित करने का फैसला हुआ था, ये टीमें कहां हैं? 

महापौर ने उप नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नैन सिंह से जवाब मांगा तो उन्होंने बताया कि बंदरों और कुत्तों को पकड़ने की फाइल टेंडर प्रक्रिया में है। जल्द ही अभियान शुरू होगा। ऐसी ही स्थिति कई अन्य मुद्दों पर भी बनी। आक्रोशित पार्षदों को समझा-बुझाकर सदन की कार्यवाही सुचारू कराई गई। हंगामे के बीच कई प्रस्तावों को मंजूरी भी मिली।

बैठक में गौरव सक्सेना ने कान्हा उपवन गोशाला में गायों की दुर्दशा का पुराना मुद्दा फिर से उठाया। कहा कि यह मामला हमारी आस्था से जुड़ा है। गोमाता की यह दुर्दशा असहनीय है। उन्होंने इस मामले की जांच कराने और पार्षदों को किसी भी समय गोशाला का निरीक्षण करने की अनुमति देने की मांग की। महापौर ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि कोई भी पार्षद नगर निगम को सूचना देकर किसी भी दिन गोशाला का दौरा कर सकता है। 
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ये प्रमुख मुद्दे भी उठाए गए 
  • अमूल और पराग के बूथों पर तंबाकू और सिगरेट बेचे जाने पर कार्रवाई की मांग की।
  • सभी पुलों पर चाइनीज मांझे से बचाव के लिए 15 दिनों के भीतर तार लगाने का आदेश।

हर वार्ड में लगेंगी 25-25 लाइटें
गौरव सक्सेना ने शास्त्री नगर स्थित जेल के पास मिनी बाइपास की खाली पड़ी भूमि पर पार्क बनाए जाने की मांग की। इस पर संबंधित विभाग को पत्र लिखकर भूमि की स्थिति जांचने का निर्णय लिया। वहीं, आला हजरत कॉरिडोर के पुराने प्रस्ताव को महापौर ने एक बार फिर यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि यह नगर निगम से संबंधित नहीं है। दिवाली को देखते हुए हर वार्ड में 25-25 स्ट्रीट लाइटें देने का निर्णय लिया है। 
 
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