फैसले धरातल पर लागू नहीं होते, ऐसी बोर्ड बैठक का क्या फायदा
बरेली। बोर्ड की बैठक कागजी हो गई है। यहां उठाए जाने वाले मुद्दों पर आश्वासन तो मिल जाता है मगर, फैसले धरातल पर लागू नहीं होते हैं। ऐसे में इस बैठक का क्या औचित्य? सपा पार्षद दल के नेता गौरव सक्सेना, राजेश अग्रवाल और सतीश कातिब ने ये सवाल पूछते हुए कहा कि पिछली बैठक में छुट्टा गोवंश व कुत्तों को पकड़ने के लिए टीमें गठित करने का फैसला हुआ था, ये टीमें कहां हैं?
महापौर ने उप नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नैन सिंह से जवाब मांगा तो उन्होंने बताया कि बंदरों और कुत्तों को पकड़ने की फाइल टेंडर प्रक्रिया में है। जल्द ही अभियान शुरू होगा। ऐसी ही स्थिति कई अन्य मुद्दों पर भी बनी। आक्रोशित पार्षदों को समझा-बुझाकर सदन की कार्यवाही सुचारू कराई गई। हंगामे के बीच कई प्रस्तावों को मंजूरी भी मिली।
बैठक में गौरव सक्सेना ने कान्हा उपवन गोशाला में गायों की दुर्दशा का पुराना मुद्दा फिर से उठाया। कहा कि यह मामला हमारी आस्था से जुड़ा है। गोमाता की यह दुर्दशा असहनीय है। उन्होंने इस मामले की जांच कराने और पार्षदों को किसी भी समय गोशाला का निरीक्षण करने की अनुमति देने की मांग की। महापौर ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि कोई भी पार्षद नगर निगम को सूचना देकर किसी भी दिन गोशाला का दौरा कर सकता है।
ये प्रमुख मुद्दे भी उठाए गए
- अमूल और पराग के बूथों पर तंबाकू और सिगरेट बेचे जाने पर कार्रवाई की मांग की।
- सभी पुलों पर चाइनीज मांझे से बचाव के लिए 15 दिनों के भीतर तार लगाने का आदेश।
हर वार्ड में लगेंगी 25-25 लाइटें
गौरव सक्सेना ने शास्त्री नगर स्थित जेल के पास मिनी बाइपास की खाली पड़ी भूमि पर पार्क बनाए जाने की मांग की। इस पर संबंधित विभाग को पत्र लिखकर भूमि की स्थिति जांचने का निर्णय लिया। वहीं, आला हजरत कॉरिडोर के पुराने प्रस्ताव को महापौर ने एक बार फिर यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि यह नगर निगम से संबंधित नहीं है। दिवाली को देखते हुए हर वार्ड में 25-25 स्ट्रीट लाइटें देने का निर्णय लिया है।