साइबर अपराधी पहले झारखंड और बिहार में बैठकर यूपी वालों के बैंक खाते खंगाल रहे थे, अब बरेली उनका नया ठिकाना बन गया है। लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट हैक करके उनके परिचितों से रकम मांगने के साथ बैंक खातों में सीधे सेंधमारी भी यह गैंग कर रहा है।
एडीजी अविनाश चंद्र का कहना है कि लॉकडाउन के बाद साइबर क्राइम की घटनाएं जिस तेजी से बढ़ी हैं उसकी तुलना में पुलिस का प्रशिक्षण और संसाधन नाकाफी हैं लिहाजा बरेली जोन में टेक्नोलॉजी के जानकार युवा पुलिस कर्मियों के लिए विशेष प्रशिक्षण अभियान शुरू किया गया है।
कुछ सालों से झारखंड और बिहार के साइबर ठग पूरे देश में ठगी करने के लिए बदनाम हैं। कारोबारियों के मेल पर उनके विदेशी बायर्स के साथ होने वाले संवाद को यह गैंग मेल आईडी हैक करके पढ़ता रहता है और फिर भुगतान का समय आने पर कारोबारी के ही मेल एड्रस से बायर को मेल भेजकर अपने बैंक खाते में भुगतान मंगा लेता है।
इसी तरह शापिंग साइट्स के बहाने तो कभी इनाम जीतने के बहाने लोगों को कॉल करके उनके बैंक खातों की जानकारी जुटाकर यह गैंग रकम उड़ाते रहे हैं। पहली बार ऐसा हुआ है कि साइबर ठगी को देशभर में अंजाम देने वाले साइबर ठगों का ऑपरेशन सेंटर बरेली में मिला है। यहां से यह गैंग दिल्ली समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों के बैंक खातों से रकम उड़ा रहा है। चार महीने में अकेले बरेली जोन में साइबर क्राइम की 1200 से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं।
साइबर क्राइम रोकने के लिए वैसे तो रेंज मुख्यालयों पर साइबर थाने हैं लेकिन पुलिस का प्रशिक्षण और संसाधन नाकाफी हैं। साइबर अपराधियों से निपटने के लिए पुलिस को विशेष प्रशिक्षण देने का फैसला किया गया है। टेक्नोलॉजी की जानकारी रखने वाले युवा पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षित करने की प्रक्रिया जोन में शुरू हो चुकी है।
-अविनाश चंद्र, एडीजी, बरेली