बरेली। फर्जी आईएएस विप्रा शर्मा के गिरोह ने सुभाषनगर क्षेत्र निवासी युवक से 12 लाख रुपये ठग लिए। इसके बाद विप्रा का ड्राइवर और उसके अन्य गुर्गे युवक को डाक और व्हाट्सएप के जरिये नियुक्ति पत्र भेजकर झांसा देते रहे। अब सुभाषनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
नेकपुर निवासी सुमित कुमार ने इंस्पेक्टर सतीश कुमार नैन को बताया कि उनकी जान पहचान मोहल्ले के निवासी सूरज से थी। वर्ष 2023 में सूरज ने बताया कि शाहजहांपुर, बदायूं और रामपुर में समाज कल्याण विभाग में कंप्यूटर सहायक की सीधी भर्ती हो रही है। हापुड़ में तैनात एसडीएम विप्रा के ड्राइवर विनोद कुमार से उसकी दोस्ती है। चार अक्तूबर 2023 को सूरज ने उन्हें विनोद से मिलवाया। एसडीएम लिखी लग्जरी कार से विनोद कुमार उनसे मिलने आया था और नौकरी लगवाने के लिए 12 लाख रुपये की मांगे। इस पर सुमित ने सात लाख रुपये नकद और पांच लाख रुपये ऑनलाइन दे दिए। दिसंबर 2023 में डाक से उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से जारी नियुक्ति पत्र भेज दिया। इसके बाद कई बार डाक के जरिये नियुक्ति पत्र भेजे, लेकिन ज्वाॅइन कराने से रोक दिया।
नौकरी करने बदायूं पहुंचे तो खुली पोल
जब सुमित ने विनोद से कहा तो उसने आचार संहिता के बाद नियुक्ति कराने की बात कही। आचार संहिता हटने के बाद दोबारा कहा तो एक व्हाट्सएप नंबर दे दिया। चार जुलाई को व्हाट्सएप पर सूचना देकर 28 अगस्त को ज्वाॅइन करने के लिए कहा। व्हाट्सएप पर कई दस्तावेजों की मांग की गई। सुमित दस्तावेज व्हाट्सएप पर भेजते रहे। इसके बाद विप्रा के ट्रेनिंग पर जाने की बात कहकर टरकाया गया। जब सुमित डाक और व्हाट्सएप पर प्राप्त प्रपत्रों को लेकर बदायूं ज्वॉइन करने गए तो पता चला सभी कागजात फर्जी हैं।
मुकदमे की चेतावनी दी तो लौटाए सात लाख रुपये
इसके बाद सुमित ने लौटकर सूरज व विनोद से नाराजगी जाहिर की और पुलिस से शिकायत करने की बात कही। पोल खुलने के डर से विप्रा और विनोद ने सात लाख रुपये लौटा दिए, जबकि पांच लाख रुपये हड़प लिए गए। सुभाषनगर थाने में विप्रा, सूरज और विनोद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। विप्रा पर हाल ही में धोखाधड़ी के करीब दो दर्जन मामले दर्ज हो चुके हैं।