बरेली। नागरिकों की सेहत से खिलवाड़ के साथ ही मिलावटखोर खाद्य सुरक्षा विभाग को भी खुली चुनौती दे रहे हैं। महकमे की ओर से की जा रही छिटपुट कार्रवाई की वजह से उनके हौसले बुलंद हैं। खाद्य कारोबारियों की ओर से लगातार सामने आ रहे नियमों की अनदेखी के मामले इसका प्रमाण हैं। मिस ब्रांडिंग, रेगुलेशन और लेबल वायलेशन के मामलों में विभाग ने आठ माह में महज 36 कोर्ट केस दायर किए हैं।
एक्सपायर्ड तेल सीज
11 जुलाई 2026 को विभाग की टीम ने परसाखेड़ा स्थित आलम फूड प्रोडक्ट में नमकीन बनाने के लिए 89 टिन में रखा 1,335 किलो रिफाइंड पामोलिन ऑयल सीज किया था। जांच में तेल एक्सपायर पाए जाने पर यह कार्रवाई की गई थी। मिलावट की आशंका में नमकीन का नमूना भी जांच के लिए लिया गया था।
लेबल पर अधूरी जानकारी
17 जुलाई को मठ की चौकी के पास स्थित गोयल फूड्स के गोदाम से चारमीनार, न्यूट्री गोल्ड और विता गोल्ड ब्रांड के रिफाइंड सोयाबीन तेल के 249 टिन मिले थे। इनके लेबल पर निर्माता का पूरा पता और बैच नंबर दर्ज नहीं था। 3,729 किलो तेल सीज कर जांच के लिए तीनों ब्रांड के नमूने भी लिए गए थे।
आठ ब्रांड के नमूने पर कार्रवाई
सात फरवरी को विभाग की अंतरजनपदीय टीम ने फरीदपुर के गौसगंज सहाय स्थित खंडेलवाल एडिबल ऑयल प्राइवेट लिमिटेड से न्यूट्री प्लस रेपसीड ऑयल समेत आठ प्रकार के खाद्य तेलों के नमूने लिए थे। 1,485 कंटेनरों में रखा 22,273 किलो न्यूट्री प्लस रेपसीड ऑयल सीज किया गया था। जांच रिपोर्ट आने तक तेल की बिक्री, पैकिंग और इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई थी।
वर्जन
समय-समय पर फैक्टरियों की जांच की जाती है, ताकि बाजार में मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लग सके। नाम, पता, बैच नंबर, एक्सपायरी डेट आदि में गड़बड़ी पाए जाने पर उत्पाद सीज किए जाते हैं। - राहुल सिंह, सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय