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Bareilly: भाई पर शिकंजा कस रहा प्रशासन, निशाने पर भाजपा के पूर्व विधायक, लखनऊ तक पहुंच रहे सबूत

Sun, 30 Jun 2024 01:30 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

बरेली गोलीकांड में नामजद पूर्व विधायक राजेश मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल बुरे फंस गए हैं। शनिवार को भले ही उनके भाई के रिसॉर्ट पर सीलिंग की कार्रवाई हुई है, लेकिन लोग इसे गोलीकांड से जोड़कर देख रहे हैं। 
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पूर्व विधायक राजेश मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली के पीलीभीत बाइपास पर हुए गोलीकांड के बाद बने हालात में भाजपा के पूर्व विधायक राजेश मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल बुरी तरह फंस गए हैं। वह अपने ही दल के कुछ नेताओं के निशाने पर हैं। वहीं, पुलिस और प्रशासन भी इस मामले में फूंक-फूंककर कदम रख रहा है। 

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यह बात काफी हद तक साफ हो चुकी है कि फायरिंग मामले में दोनों गुटों को राजनीतिक संरक्षण मिलता रहा है। अब पूर्व विधायक के भाई पर अवैध निर्माण से जुड़े मामले में शिकंजा कस गया है। शनिवार को बीडीए की टीम ने पप्पू भरतौल के भाई रमेश मिश्रा का लक्ष्य रिसॉर्ट सील कर दिया। 

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अधिकारी इसे सामान्य कार्रवाई बता रहे हैं, लेकिन लोग इसे हालिया गोलीकांड से जोड़कर देख रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक गोलीकांड के अलावा भी कई बातें एक साथ जुड़ने से यह नौबत आई है। पूर्व विधायक भी मौके की नजाकत को समझते हुए खुलकर नहीं बोल रहे हैं। 

गोलीकांड में हैं नामजद 
वह सिर्फ यही कह रहे हैं कि उनका किसी पक्ष से कोई मतलब नहीं है। लखनऊ से निर्देश मिलने पर मामले में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। बताया जा रहा है कि पूर्व विधायक पर कार्रवाई का निर्णय भी उच्च स्तर से ही होगा। बता दें कि गोलीकांड में पप्पू भरतौल नामजद आरोपी हैं। 

एक पूर्व सांसद बरसों से पूर्व विधायक के तीखे बयानों का शिकार होते रहे हैं। चुनावी बिसात पर धराशायी हुए एक और पूर्व सांसद भी खार खाए बैठे हैं। इनके अलावा कई वर्तमान जनप्रतिनिधि भी पूर्व विधायक के तेवरों का शिकार हो चुके हैं। 
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संकट में राजनीतिक भविष्य 
सूत्र बताते हैं कि पूर्व विधायक का राजनीतिक भविष्य संकट में पड़ने के बाद पांच बड़े नेता उनको टेंशन दे रहे हैं। मौजूदा घटनाक्रम में उनकी किसी भी तरह की सहभागिता के साक्ष्य हाईकमान को सौंपने के साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि उनके असर वाले क्षेत्र से ज्यादा वोट मिले होते तो आंवला सीट हाथ से नहीं निकलती। 

चुनाव से पहले और उसके बाद की सोशल मीडिया पोस्ट व कमेंट भी साक्ष्य के तौर पर भेजे जाने की चर्चा है। चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर जो बहस हुई थी, वह अब प्रमाण का काम कर रही है।
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