- डीएपी के लिए एक माह से परेशान हैं किसान, जिले में लगातार हो रही गेहूं की बोआई
बरेली। जिले में डीएपी ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है। पिछले डेढ़ माह से किसान बेहद परेशान हैं। उन्हें गेहूं बोआई तक के लिए डीएपी नहीं मिल पा रही है। सरकारी दुकानों पर तो डीएपी बिल्कुल गायब ही हो गई है। एक दिन पहले शुक्रवार को जरूर निजी दुकानों पर 213 टन डीएपी पहुंच गई लेकिन इससे किसानों का भला नहीं हो रहा है। इसके बावजूद उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पिछले एक माह से जिले में डीएपी की किल्लत बनी हुई है। जिस दौरान जिले में धान की कटाई शुरू हुई थी। उसी समय से किसान गेहूं बोआई की तैयारियों में जुटे हुए हैं। वह लगातार सहकारी समितियों और दुकानों के चक्कर लगा रहे हैं। शुरुआती दौर में कुछ सहकारी समितियों पर डीएपी मौजूद थी लेकिन उसके बाद किल्लत होती चली गई। अभी दिवाली के मौके पर डीएपी की एक छोटी रैक आई थी लेकिन वह दो दिन के लिए भी काफी नहीं हुई। उसके बाद सहकारी समितियों और दुकानों पर डीएपी खत्म हो गई है। एक नवंबर से लगातार जिले में गेहूं की बोआई चल रही है। इससे जिले में डीएपी की सबसे ज्यादा मांग है और किसान भी सबसे ज्यादा डीएपी को पसंद करते हैं। डीएपी न मिलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। उन्हें गेहूं बोआई के लिए डीएपी नहीं मिल रही है।
इधर शुक्रवार को निजी दुकानों पर 213 टन डीएपी पहुंच गई। जिले की 359 निजी दुकानों पर डीएपी और 403 दुकानों पर एनपीके उपलब्ध है। इसके बावजूद किसान कृफको और इफको की डीएपी की मांग कर रहे हैं।
सरकारी बीज भंडारों पर गेहूं का बीज भी समाप्त
- जिले के सरकारी बीज भंडारों पर गेहूं का बीज भी समाप्त हो गया है। बताया जा रहा है कि सभी बीज भंडारों पर 5500 क्विंटल गेहूं का बीज आया था। उनमें दो प्रजातियों का बीज एक सप्ताह पहले समाप्त हो गया था। अब शेष चार प्रजातियों का बीज भी समाप्त हो गया है। अब किसानों को निजी दुकानों से बीज खरीदना पड़ सकता है।
- जिले में 213 टन डीएपी पहुंच गई है। किसान निजी दुकानों पर जाकर डीएपी खरीद सकते हैं। कोई दुकानदार टैगिंग करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।- ऋतुषा तिवारी, जिला कृषि अधिकारी
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